Class 5 Hindi Grammar Chapter 20 पत्र लेखन

NCERT Solutions for Class 5 Hindi Grammar Chapter 20 पत्र लेखन (Ptr Lekhan). Learn here about how to write a letter – formal or informal with suitable examples for session 2020-2021.

You will know here about the points to be remember during Letter Writing and how to write a letter in impressive way. Some sample Patr are given here, which help the students to get an idea about Patr Lekhan.




Class 5 Hindi Grammar Chapter 20 Ptr Lekhan

कक्षा: 5हिंदी व्याकरण
अध्याय: 20पत्र लेखन

पत्र लेखन

पत्र लेखन के द्वारा हम दूर स्थित सगे-संबंधियों, कार्यालय के अधिकारियों, व्यापारियों, तथा मित्रों के साथ मन के विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। पत्र लिखते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

    • 1. पत्र किसको लिखना है और उसमें क्या समाचार लिखना है।
    • 2. जिसको पत्र लिखना है उससे संबंध और उसके पद के अनुसार शिष्टाचार-पूर्ण शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।
    • 3. पत्र की भाषा सरल-सरस तथा स्पष्ट होनी चाहिए।
    • 4. पत्र में व्यर्थ की बातें नहीं लिखनी चाहिए और न ही पत्र में अभिमान पूर्ण शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।
    • 5. पत्र का आरंभ तथा समाप्ति अच्छे ढंग से होनी चाहिए।
    • 6. पता लिखते समय पूर्ण सवधानी बरतनी चाहिए।




पत्र के भाग

पत्र को छ: भागों में विभाजित किया जा सकता है:

    1. पत्र लिखने वाले का सही पता और तिथि।
    2. उचित संबोधन एवं अभिवादन।
    3. कुशलता देना एवं कुशलता पूछना।
    4. अन्य समाचार लिखना।
    5. अंतिम भाग में लेखक का नाम व हस्ताक्षर।
    6. पत्र पाने वाले का पता और तिथि।
1. गर्मियों की छुट्टियाँ साथ बिताने के लिए मित्र को निमंत्रण-पत्र।

राजधानी पार्क, नई दिल्ली।
दिनांक : 07 जुलाई 20xx
मित्र शुभम
मधुर-स्मृति
मुझे आशा है कि तुम्हारे विद्यालय में गर्मी की छुट्टियों पर चर्चा होने लग गई होगी। कई विद्यार्थियों ने छुट्टियों में घूमने की योजना भी बना ली होगी। आप भी इस समय कहीं पर जाने का कार्यक्रम बनाने की तैयारी कर रहे होंगे। मैं इस पत्र द्वारा गर्मियों की छुट्टियाँ साथ बिताने के लिए निमंत्रण भेज रहा हूँ।
यह तो तुम्हे मालूम ही है कि मेरे मामा जी शिमला में मुख्याध्यापक हैं। उन्होंने पत्र भेजकर मुझे शिमला आने के लिए कहा है। शिमला का मौमस भी सुहावना रहता है। मामाजी कार द्वारा हमें घुमा भी देंगे और स्कूल का काम करने में भी हमारी मदद करेंगे। वहाँ पर मेरे पहले से ही कई मित्र हैं। हम साथ-साथ घूमेंगे तथा खेलेंगे। मुझे आशा है कि आप यह स्वर्णिम अवसर को अपने हाथ से नहीं जाने दोगे। व्यय के बारे में कोई चिंता न करना, वह सब प्रबंध मैं पहले से ही कर चुका हूँ।
तुम मेरे पास कब तक पहुंच जाओगे, शीघ्र लिखना। माताजी तथा पिताजी को मेरी तरफ से प्रणाम कहना।
तुम्हारा मित्र मयंक

2. पत्र/पत्रिका का ग्राहक बनने के लिए संपादक को पत्र।

सेवा में,
संपादक महोदय,
नवभारत टाइम्स, दिल्ली,
श्रीमान् जी,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आपकी पत्रिका चंदा मामा का नियमित पाठक हूँ। मुझे यह प्रिय पत्रिका हर बार कठिनाई से प्राप्त होती है। अतः मैं इस पत्रिका का स्थायी ग्राहक बनना चाहता हूँ। कृपया अपनी ग्राहक सूची में मेरा नाम तथा पता भी लिख लें, ताकि आगामी मास से यह पत्रिका नियमित रूप से मुझ तक पहुँच सके। मैं आपका अति आभारी रहूँगा।,
पत्रिका का चंदा मैं मनीआर्डर द्वारा भेज रहा हूँ।
शुभाकांक्षी
अमन कुमार
1207/34, राज नगर, गाजियाबाद
दिनांक : 7 मार्च 20xx



3. गाड़ी के प्रबंध के लिए प्रधानाचार्य/मुख्याध्यापक को प्रार्थना-पत्र।

सेवा में,
मान्यवर प्रधानाचार्य जी,
आदर्श बाल निकेतन,
जालंधर।
श्रीमान् जी,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय में पाँचवी (बी) कक्षा का विद्यार्थी हूँ। मेरा घर विद्यालय से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर है। पैदल चलकर विद्यालय आने में असुविधा रहती है तथा कभी-कभी विद्यालय पहुंचने में देर भी हो जाती है। वर्षा होने पर विद्यालय पहुँचना असंभव हो जाता है।
श्रीमान् जी मेरे मोहल्ले में विद्यालय द्वारा भेजी हुई दो गाड़ियाँ आती हैं। गाड़ी में बैठने का स्थान भी है। अतः आपसे प्रार्थना है कि आप मुझे गाड़ी द्वारा विद्यालय आने की आज्ञा प्रदान करें। आपकी अति कृपा होगी।
धन्यवाद
दिनांक: 14 अप्रैल 20xx
आपका आज्ञाकारी शिष्य
अंशुल शर्मा, कक्षा पाँचवी (बी)

4. त्रैमासिक परीक्षा में आए अंकों की जानकारी देते हुए बड़े भाई को पत्र।

छात्रावास,
मॉडल पब्लिक स्कूल,
देहरादून
दिनांक : 4 जून, 20xx
आदरणीय भाई साहब,
सादर प्रणाम।
आपका पत्र मिला। पत्र पढ़कर मालूम हुआ कि आपने मेरे त्रैमासिक परीक्षा के अंक जानने चाहे हैं। प्रिय भाई मुझे अंक कार्ड कल ही मिला है। आपको यह जानकर अति प्रसन्नता होगी कि मै 700 अंकों में से 650 अंक प्राप्त करके अपनी कक्षा में प्रथम स्थान पर रहा हूँ। गणित में मेरे 100 में से 98 तथा अंग्रेजी में 92 अंक आए हैं। संस्कृत में 88 अंक हैं जो मुझे कम लग रहे हैं। इस कमी को अगली परीक्षा में सुधारने का प्रयत्न करूँगा। फोन द्वारा पिताजी को भी मेरे परीक्षा के परिणाम से अवगत करा देना।
माताजी को प्रणाम।
पाने वाले का पता
आपका छोटा भाई
रोहित



5. प्रधानाचार्य को आवेदन-पत्र, बुक बैंक से पुस्तकें दिलवाने के लिए।

सेवा में,
श्रीमान् प्रधानाचार्य जी,
केंद्रीय विद्यालय,
जनकपुरी, नई दिल्ली
मान्यवर,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय में पाँचवी (बी) कक्षा का छात्र हूँ। मेरे पिताजी निर्धन व्यक्ति हैं और मुझे पढ़ा सकने में असमर्थ हैं। मैं जैसे-तैसे अपनी पढ़ाई कर रहा हूँ। मैने कुछ रुपये इधर-उधर कार्य करके इकट्ठे किए थे। उससे मैंने विद्यालय में प्रवेश तथा कुछ कापियाँ खरीद ली हैं। लेकिन अपनी कक्षा की पुस्तकें खरीद पाने में असमर्थ हूँ। मेरी निर्धनता को देखते हुए अपने विद्यालय के बुक बैंक से पाँचवी कक्षा की सारी पुस्तकें दिलवाने की आज्ञा प्रदान करें। जिससे मैं पुस्तकें न खरीद पाने की चिंता से मुक्त हो सकूँ। पुस्तकें दिलवाने की अति कृपा होगी। अतः इसके लिए मैं आजीवन आपका आभारी रहूँगा।
धन्यवाद
दिनांकः 14 मई, 20xx
आपका आज्ञाकारी शिष्य
राजेश
कक्षा- पाँचवी (बी)

6. पिता के स्थानांतरण हो जाने पर विद्यालय से प्रमाण पत्र लेने हेतु प्रार्थना-पत्र।

सेवा में,
श्रीमान प्रधानाध्यापक जी,
आदर्श बाल निकेतन,
कानपुर।
मान्यवर,
सानुरोध प्रार्थना है कि मेरे पिताजी का स्थानांतरण कानपुर से जयपुर हो गया है। इसलिए हमारा पूरा परिवार जयपुर जा रहा है। मुझे न चाहते हुए भी यह विद्यालय छोड़कर उनके साथ जाना पड़ रहा है। अतः आपसे निवेदन है कि मुझे विद्यालय छोड़ने का प्रमाण-पत्र देने की कृपा करें, ताकि मेरा वहाँ विद्यालय में प्रवेश हो सके।
धन्यवाद।
दिनांक : 8 सितंबर, 20xx
आपका आज्ञाकारी शिष्य
राजेश गुप्ता कक्षा पाँचवी
(ब) अनुक्रमांक -2

7. परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने पर पिता की ओर से पत्र।

1241/3 अल्लीगंज
भागलपुर (बिहार)
दिनांक 4 अप्रैल 20xx
प्रिय योगेश,
स्नेहाशीष!
आपके प्रधानाचार्य द्वारा भेजा गया प्रगति कार्ड मिला। परीक्षा पत्र के अंक देखे। इतने कम अंक देखकर मन बहुत उदास हुआ। कहाँ तुम यहाँ पर प्रथम आते थे, और वहाँ पर पास होने के भी लाले पड़ गए हैं। क्या गणित में 35 अंक, अंग्रेजी में 27 अंक लेने के लिए तुम्हें छात्रवास में भेजा था। मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद न थी, लगता है तुम बुरी संगत में पड़ गए हो। अब भी समय रहते संभल जाओ। मुझे आशा है कि तुम अगली परीक्षा में अच्छे अंक लेकर मेरे दु:खी मन को प्रसन्न करने का प्रयत्न करोगे। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है, इसे समझकर अच्छे अंक लेने के लिए अभी से जुट जाओ।
शुभाकांक्षी
तुम्हारा पिता



पत्र लेखन का क्या महत्त्व है? तथा अच्छे पत्र लेखन के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

पत्र लेखन के द्वारा हम दूर स्थित सगे-संबंधियों, कार्यालय के अधिकारियों, व्यापारियों, तथा मित्रों के साथ मन के विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। पत्र लिखते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
1. पत्र किसको लिखना है और उसमें क्या समाचार लिखना है।
2. जिसको पत्र लिखना है उससे संबंध और उसके पद के अनुसार शिष्टाचार-पूर्ण शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।
3. पत्र की भाषा सरल-सरस तथा स्पष्ट होनी चाहिए।
4. पत्र में व्यर्थ की बातें नहीं लिखनी चाहिए और न ही पत्र में अभिमान पूर्ण शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।
5. पत्र का आरंभ तथा समाप्ति अच्छे ढंग से होनी चाहिए।
6. पता लिखते समय पूर्ण सवधानी बरतनी चाहिए।

एक औपचारिक पत्र के कौन-कौन से अंग होते हैं?

औपचारिक-पत्र (प्रारूप) के निम्नलिखित सात अंग होते हैं:
(1) ‘सेवा में’ लिख कर, पत्र प्रापक का पदनाम तथा पता लिख कर पत्र की शुरुआत करें।
(2) विषय – जिसके बारे में पत्र लिखा जा रहा है, उसे केवल एक ही वाक्य में शब्द-संकेतों में लिखें।
(3) संबोधन – जिसे पत्र लिखा जा रहा है- महोदय/महोदया, माननीय आदि शिष्टाचारपूर्ण शब्दों का प्रयोग करें।
(4) विषय-वस्तु- इसे दो अनुच्छेदों में लिखना चाहिए-
पहला अनुच्छेद – “सविनय निवेदन यह है कि” से वाक्य आरंभ करना चाहिए, फिर अपनी समस्या के बारे में लिखें।
दूसरा अनुच्छेद – “आपसे विनम्र निवेदन है कि” लिख कर आप उनसे क्या अपेक्षा (उम्मीद) रखते हैं, उसे लिखें।
(5) हस्ताक्षर व नाम- धन्यवाद या कष्ट के लिए क्षमा जैसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए और अंत में भवदीय, भवदीया, प्रार्थी लिखकर अपने हस्ताक्षर करें तथा उसके नीचे अपना नाम लिखें।
(6) प्रेषक का पता- शहर का मुहल्ला/इलाका, शहर, पिनकोड आदि।
(7) दिनांक।

औपचारिक पात्र कितने प्रकार के होते हैं?

औपचारिक-पत्रों को तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:
(1) प्रार्थना-पत्र – जिन पत्रों में निवेदन अथवा प्रार्थना की जाती है, वे ‘प्रार्थना-पत्र’ कहलाते हैं। प्रार्थना पत्र में अवकाश, शिकायत, सुधार, आवेदन आदि के लिए लिखे गए पत्र आते हैं। ये पत्र स्कुल के प्रधानाचार्य से लेकर किसी सरकारी विभाग के अधिकारी को भी लिखे जा सकते हैं।
(2) कार्यालयी-पत्र – जो पत्र कार्यालयी काम-काज के लिए लिखे जाते हैं, वे ‘कार्यालयी-पत्र’ कहलाते हैं। ये सरकारी अफसरों या अधिकारियों, स्कूल और कॉलेज के प्रधानाध्यापकों और प्राचार्यों को लिखे जाते हैं। इन पत्रों में डाक अधीक्षक, समाचार पत्र के सम्पादक, परिवहन विभाग, थाना प्रभारी, स्कूल प्रधानाचार्य आदि को लिखे गए पत्र आते हैं।
(3) व्यवसायिक-पत्र – व्यवसाय में सामान खरीदने व बेचने अथवा रुपयों के लेन-देन के लिए जो पत्र लिखे जाते हैं, उन्हें ‘व्यवसायिक-पत्र’ कहते हैं। इन पत्रों में दुकानदार, प्रकाशक, व्यापारी, कंपनी आदि को लिखे गए पत्र आते हैं।

Ptr Lekhan
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