Class 5 Hindi Grammar Chapter 21 अनुच्छेद लेखन

NCERT Solutions for Class 5 Hindi Grammar Chapter 21 अनुच्छेद लेखन (Anuchchhed Lekhan) updated for new academic session 2020-2021 for CBSE and state board.

Here, students will learn about how to write Anuchchhed and what are the main point what should be remembered during Anuchchhed Lekhan.




Class 5 Hindi Grammar Chapter 21 Anuchchhed Lekhan

कक्षा: 5हिंदी व्याकरण
अध्याय: 21अनुच्छेद लेखन

अनुच्छेद लेखन

जब किसी विषय पर निश्चित क्रम से विचारों को प्रकट किया जाता है, तो ऐसे लेख को अनुच्छेद कहते हैं। किसी भी अनुच्छेद को मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा जा सकता है:

    • आरंभ- इसे भूमिका या प्रस्तावना कहते हैं। इसमें विषय का साधारण परिचय दिया जाता है।
    • मध्य भाग- इसमें अनुच्छेद की सारी बातें विस्तार से लिखी जाती हैं।
    • अंत- इसे ‘उपसंहार’ भी कहा जाता है। इस भाग में अनुच्छेद का निष्कर्ष होता है।




अनुच्छेद लिखते समय किन बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए?

अनुच्छेद लिखते समय इन बातों पर विशेष ध्यान दीजिए:

    1. निर्धारित विषय के संबंध में आप जितनी भी बातें लिखना चाहते हैं, उनकी सूची बना लीजिए।
    2. अनुच्छेद की रूपरेखा (outline) बना लेनी चाहिए।
    3. अनुच्छेद की भाषा सरल तथा शुद्ध होनी चाहिए।
    4. अनुच्छेद का आकार निश्चित कर लीजिए।
    5. अनुच्छेद लिखने के बाद उसे एक बार अवश्य पढ़िए और देखिए कि कहीं कोई बात छूट तो नहीं गई।
आगे उदाहरण के रूप में कुछ अनुच्छेद दिए जा रहे हैं:
अपने मित्र के जन्मदिन का उपहार

संकेत बिंदु : पार्टी, उपहार के लिए बाजार जाना, उपहार का चुनाव, उपहार की पैकिंग,
‘जन्मदिन’ अपने आप में एक सुंदर-सा शब्द है, जिसे सुनते ही मन में ज़ोरों से खुशी की घंटियाँ बजने लगती हैं। कल्पना करते हुए ऐसा लगता है कि मानों किसी पार्टी में झूम रहे हों। जैसे ही कल्पनाओं से बाहर आते हैं तो याद आता है कि जन्मदिन पर उपहार कैसा और क्या होना चाहिए। मेरे मित्र का दो दिन पहले ही जन्मदिन था। सोचता रहा कि क्या दूँ। मैं अपने माता-पिता के साथ बाज़ार गया। वहाँ बहुत कुछ देखा- खिलौने, पुस्तकें, कपड़े, क्रिकेट सैट और भी कई सजावट की चीजें। ख़रीदना तो किसी एक को था। फिर सोचता रहा कि पसंद आएगा या नहीं। तभी मम्मी ने सुझाव दिया कि कुछ पुस्तकें खरीद ली जाएँ, क्योंकि उसकी पढ़ने में अधिक रुचि है। मम्मी की बात मानकर मैंने (Famous Five Series) खरीदी। मित्र को आश्चर्यचकित करने के लिए इन्हें सुंदर से रंगीन कागज़ में लपेटकर ले गया। जन्मदिन की पार्टी समाप्त होने पर मित्र ने उपहार खोलने में मदद के लिए रोक लिया। मैं भी यह देखने के लिए उत्साहित था कि उसे मेरा उपहार पसंद आएगा या नहीं। हमने बारी-बारी सभी उपहार खोले। पसंद और नापसंद उसके चेहरे पर झलक रही थी। जब उसने मेरा उपहार खोला तो उसके चेहरे पर खुशी को देखकर मैं गद्गद हो गया। मन में सोचने लगा कि मेरा उपहार उसे सबसे अधिक पसंद आया है। मित्र ने मुझे धन्यवाद करते हुए कहा कि इस (Famous Five Series) को पढ़ने की बहुत लालसा थी, जो आज पूरी हुई। मित्रो, किसी के लिए उपहार खरीदते समय हमें उसकी पसंद को ध्यान में रखना चाहिए।

मेरे जीवन का सबसे अच्छा दिन

संकेत बिंदु : जीवन का अच्छा दिन, जीवन का बुरा दिन, भाई से मिलने का खुशी
मनुष्य के जीवन का हर दिन एक समान नहीं होता। जीवन में उतार-चढ़ाव आते ही रहते हैं। कई दिन तो इतने बुरे बीतते हैं कि हम उन्हें भूल जाना चाहते हैं, परंतु कुछ दिन ऐसे होते हैं जिन्हें हम अपनी यादों में सदा के लिए संजोकर रख लेना चाहते हैं। उन्हें याद करने मात्र से ही हमें सुख और खुशी का एहसास होता है। मेरे अब तक के जीवन में भी कई दिन आए और गए, परंतु 6 जून, 20xx मेरे जीवन का सबसे अच्छा दिन था। उसे मैं सदा अपनी यादों में सँजोकर रखना चाहती हूँ। नानी जी ने मेरा माथा चूमते हुए बताया कि मेरा भाई आया है। मैं तो खुशी से झूम उठी। मुझे लगा, आज मेरे जीवन का सबसे अच्छा दिन है, क्योंकि मैं भगवान से भाई के लिए रोज़ प्रार्थना करती थी। अब रक्षाबंधन के दिन मैं भी अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधा करूँगी। यह सोचकर मन खुशी से नाचने लगा। मैं अपनी नानी से जल्दी अस्पताल चलने के लिए कहने लगी, क्योंकि मुझे अपने भाई को देखना था। अस्पताल पहुँचकर सब लोगों ने मुझे प्यार किया और बधाई दी। लोगों में मिठाई बाँटी गई। चारों ओर खुशी का माहौल था। मैं तो फूली न समाई और यही मेरे जीवन का सबसे अच्छा दिन था। वह दिन मेरे मन के आकाश में चाँद-तारे और सूरज की भाँति सदा चमकता रहेगा।



मेरा प्रिय खिलाड़ी

संकेत बिंदु : जीवन में खेलों का महत्व, प्रिय खिलाड़ी, उनकी विशेषता का उल्लेख।
खेल और खिलाड़ी में सभी रुची लेते हैं। भारत में क्रिकेट सबसे लोकप्रिय खेल है। क्रिकेट मैच के दिन लोग भारी संख्या में क्रिकेट के मैदान में टूट पड़ते हैं और भारतीय टीम को प्रोत्साहित करते हैं। मेरा प्रिय खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर है। यह नाम आजकल बच्चे-बच्चे की जुबान पर है। छोटे-से-छोटा बच्चा भी उनकी तस्वीर देखकर उन्हें पहचान लेता है और उन्हीं की तरह बनना चाहता है। सचिन क्रिकेट के इतिहास में सबसे प्रतिभावान बल्लेबाज़ हैं। भारत की ओर से सन् 1989-90 में सोलह वर्ष की आयु में सचिन ने क्रिकेट के मैदान में पहली बार कदम रखा था। तब से आज तक वे नई-नई ऊँचाइयों को छूते हुए सदा आगे बढ़ते जा रहे हैं। वे आज जिस स्तर पर पहुँचे हैं, यह उनकी लगन और परिश्रम का फल है। उन्होंने अपने आपको पूर्ण रूप से क्रिकेट को समर्पित कर दिया है। सचिन की गिनती देश के ही नहीं, बल्कि विश्व के महान बल्लेबाज़ों में की जाती है। अपने नब्बे-वें जन्मदिन पर सर डोनाल्ड ब्रैडमैन ने सचिन को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित कर उनकी प्रशंसा की थी। ब्रैडमैन के बाद सचिन को ही श्रेष्ठ क्रिकेटर मानते हैं। सचिन कमाल के बल्लेबाज़ हैं। वे लगातार क्रिकेट के रिकॉर्ड तोड़ने में लगे हैं। सन् 1992 में आस्ट्रेलिया के विरुद्ध खेलते हुए उन्होंने अपना पहला शतक बनाया। शेनर्वार्न जैसे महान गेंदबाज़ की गेंदों को उन्होंने इस तरह पीटा कि उनके छक्के छूट गए। सितंबर 1998 में जिंबाब्वे में 127 रन बनाकर वे एकदिवसीय क्रिकेट के सबसे अधिक शतक बनाने वाले खिलाड़ी बन गए। यह एकदिवसीय मैच में उनका 22वां शतक था। भारत सरकार ने भी उन्हें ‘खेल-रत्न’ और ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया है। मैं भविष्य में सचिन तेंदुलकर के समान श्रेष्ठ खिलाड़ी बनना चाहता हूँ।

हमारे जीवन में कंप्यूटर का महत्व

संकेत बिंदु : विज्ञान की महत्त्पूर्ण खोज, इसका विकास, प्रारंभिक अवस्था, प्रयोग में सावधानियाँ। आज कंप्यूटर का शोर चारों ओर है। यह विज्ञान की नवीनतम खोज है। इसका प्रचार और प्रसार दुनिया में बहुत तेज़ी से हुआ है। हमारा देश भी इस क्षेत्र में पीछे नहीं है। कंप्यूटर विज्ञान द्वारा बनाया गया एक यंत्र-दिमाग है। यह कठिन-से-कठिन अंकों की गुत्थियों को आसानी से सुलझा सकता है। यदि मनुष्य से इसके संचालन में कोई गलती हो जाए तभी यह गलती कर सकता है, अन्यथा नहीं। सत्य तो यह है कि यह हमारे जीवन का एक ज़रूरी अंग बन चुका है। कंप्यूटर के खेल तो एक चार-पाँच साल का बच्चा भी आसानी से खेल सकता है। घर, स्कूल, कार्यालयों व बाजारों में, सभी जगह कंप्यूटरों का उपयोग हो रहा है। इंटरनेट के द्वारा हम अपनी सभी समस्याओं को आसानी से हल करने में सफल हुए हैं। ‘ई-मेल’ के द्वारा हम दूर बैठे व्यक्तियों से आसानी से तुरंत बातचीत कर सकते हैं। आज कंप्यूटर रहित जीवन की कल्पना करने से ही मन डरने लगता है। जीवन व्यर्थ व सूना-सूना लगने लगता है। जहाँ एक ओर कंप्यूटर ने मानव को अपना गुलाम बनाकर आलसी, मस्तिष्क से पंगु व कई लोगों को बेरोज़गार किया है, वहीं दूसरी ओर देश को प्रगति की ओर बढ़ाया है। कंप्यूटरीकरण आज समय की माँग है। इसका महत्त्व इसके सदुपयोग और दुरुपयोग पर निर्भर करता है।

जब मैंने साइकिल चलाना सीखा

संकेत बिंदु: जन्मदिन पर उपहार, चलाने के लिए उत्साहित, मन में छिपा डर, गिरना और चोट लगना, आत्मविश्वास जागाना, खुशी का ठिकाना न रहना
मेरे सातवें जन्मदिन पर मुझे मेरे नाना जी ने साइकिल दी। मैं इस साइकिल को पाकर उसे चलाने के लिए बहुत उत्साहित था। जिस दिन मुझे यह साइकिल मिली उसी दिन शाम को मेरी मम्मी जी ने सिखाने का प्रयास किया। मैं डर-डर कर उस पर बैठा। उन्होंने पीछे से उसे पकड़ा। मैं हैंडल पकड़कर चलाने की कोशिश करने लगा। बार-बार पीछे देखता कि मम्मी ने पकड़ा हुआ है या नहीं। थोड़ी देर तो मैं चलाता रहा कि मम्मी भी साथ हैं। अचानक मैंने पीछे देखा तो मुझे कोई दिखाई नहीं दिया। मैं डर गया और धड़ाम से नीचे गिर गया। मेरे दोनों घुटनों में बहुत चोट आई। कई दिन तक मुझे बिस्तर पर ही पड़े रहना पड़ा। कुछ दिन बाद जब मैं ठीक होने लगा तो साइकिल को फिर से चलाने का साहस जुटाया। तब पापा ने मेरा साथ दिया। पापा पीछे से साइकिल को पकड़ते और मैं चलाता। कई दिन तक यह सिलसिला चलता रहा। लेकिन इस बार मैं दृढ़-निश्चय से साइकिल पर बैठा कि सीख कर ही दम लूँगा। यह बात मैंने सुनी थी कि जिनके इरादे पक्के होते हैं, उन्हें सफलता अवश्य मिलती है। चलाते-चलाते मैं बहुत आगे पहुँच चुका था। मेरी खुशी का ठिकाना न रहा। आज जब मैं साइकिल चलाता हूँ तो लगता है कि महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की तरह हवा से बातें कर रहा हूँ। इस उपलब्धि के लिए मैं अपने नाना जी और पापा को धन्यवाद देता हूँ।



अनुच्छेद लेखन से क्या तात्पर्य है? तथा इसके मुख्य अंग कौन से हैं?

जब किसी विषय पर निश्चित क्रम से विचारों को प्रकट किया जाता है, तो ऐसे लेख को अनुच्छेद कहते हैं।
किसी भी अनुच्छेद को मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा जा सकता है:
(a). आरंभ: इसे भूमिका या प्रस्तावना कहते हैं। इसमें विषय का साधारण परिचय दिया जाता है।
(b). मध्य भाग: इसमें अनुच्छेद की सारी बातें विस्तार से लिखी जाती हैं।
(c). अंत: इसे उपसंहार भी कहा जाता है। इस भाग में अनुच्छेद का निष्कर्ष होता है।

अनुच्छेद लेखन में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

अनुच्छेद लिखते समय इन बातों पर विशेष ध्यान दीजिए:
• निर्धारित विषय के संबंध में आप जितनी भी बातें लिखना चाहते हैं, उनकी सूची बना लीजिए।
• अनुच्छेद की रूपरेखा बना लेनी चाहिए।
•अनुच्छेद की भाषा सरल तथा शुद्ध होनी चाहिए।
•अनुच्छेद का आकार निश्चित कर लीजिए।
•अनुच्छेद लिखने के बाद उसे एक बार अवश्य पढ़िए और देखिए कि कहीं कोई बात छूट तो नहीं गई।

निम्बंध और अनुच्छेद में क्या अंतर है?

निम्बंध और अनुच्छेद में निम्न अंतर हैं:
(a). निम्बंध का आकार बड़ा होता है जबकि अनुच्छेद छोटा होता है।
(b). निम्बंध में बातें विस्तार से उद्धाहरण शीत समझाई जाती है जबकि अनुच्छेद में उन्ही को संक्षेप में लिखा जाता है।
(c). निम्बंध में किसी विषय के बारे में बताया जाता है जबकि अनुच्छेद में विषय के एक पक्ष को लिखा जाता है।

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