Class 5 Hindi Grammar Chapter 9 अविकारी शब्द

NCERT Solutions for Class 5 Hindi Grammar Chapter 9 अविकारी शब्द (Avikari Shabd) with examples and explanation for current academic session 2021-2022. Here, students can learn Avikari Shabd and their four kinds with suitable examples.

Examples in Hindi Grammar help students to understand the concepts properly.




Class 5 Hindi Grammar Chapter 9 Avikari Shabd

कक्षा: 5हिंदी व्याकरण
अध्याय: 9अविकारी शब्द

अविकारी शब्द

वे शब्द जिनके रूप में विकार या परिवर्तन होता है, उन्हें विकारी शब्द कहते हैं। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण तथा क्रिया शब्दों के रूप में परिवर्तन होता है। अतः ये विकारी शब्द हैं। इसके ठीक विपरीत अविकारी शब्दों में कभी विकार नहीं आता। जैसे:
दादा जी कल गए।
दादी जी कल गईं।
हम कल जाएँगे।

यहाँ कल अविकारी शब्द है, जो कि एक क्रियाविशेषण है। अविकारी शब्द चार प्रकार के होते हैं:

    • 1. क्रियाविशेषण
    • 2. संबंधबोधक
    • 3. समुच्चयबोधक
    • 4. विस्मयादिबोधक




क्रियाविशेषण

जो शब्द क्रिया के काल, स्थान, रीति, परिमाण आदि विशेषताएँ बताते हैं, उन्हें क्रियाविशेषण कहते हैं। जो शब्द क्रिया की विशेषता बताएँ उन्हें क्रियाविशेषण कहते हैं। जैसे:
1. घोड़ा तेज़ दौड़ रहा है।
2. प्रिया रोज़ पढ़ती है।
3. मेरा बस्ता ऊपर रखा है।

इन वाक्यों मे तेज, रोज तथा ऊपर शब्द क्रिया के समय, स्थान तथा रीती बता रहे हैं। क्रिया की विशेषता बताने के कारण ये शब्द क्रियाविशेषण कहलाते हैं। क्रियाविशेषण के भेद:

    • (i). कालवाचक क्रियाविशेषण
    • (ii). स्थानवाचक क्रियाविशेषण
    • (iii). रीतिवाचक क्रियाविशेषण
    • (iv). परिमाणवाचक क्रियाविशेषण
1. कालवाचक क्रियाविशेषण

वे शब्द जिनसे क्रिया के होने का समय पता चले, कालवाचक विशेषण कहलाते हैं। जैसे:
हमेशा, रोज़, आज, अभी, सदा, अकसर, जब, तब, अब, कल, परसों, कभी-कभी, आजकल, प्रतिदिन, लगातर, बार-बार, दिनभर, पहले आदि। समयवाचक क्रियावाचक क्रियाविशेषण जानने के लिए प्रश्नवाचक शब्द है: कब।

2. स्थानवाचक क्रियाविशेषण

ये शब्द क्रिया के होने का स्थान बताते हैं। जैसे:
पास, दूर, सामने, बाहर, उपर, नीचे, पीछे, यहाँ, वहाँ, इधर, उधर, इस ओर, दाएँ, बाएँ आदि। स्थानवाचक क्रियाविशेषण जानने के लिए प्रश्नवाचक शब्द है: किधर, कहाँ।

3. रीतीवाचक क्रियाविशेषण

ये शब्द क्रिया के होने का ढंग या रीति बताते हैं। जैसे:
ध्यानपूर्वक, रोते-रोते, हँसते हुए, तेज, धीरे-धीरे, दौड़कर, जल्दी, अच्छा, अचानक, आदि। रीतिवाचक क्रियाविशेषण जानने के लिए प्रश्नवाचक शब्द है: कैसे।

4. परिमाणवाचक क्रियाविशेषण

ये शब्द क्रिया के होने का परिमाण बताते हैं। जैसे:
कम, ज्यादा, इतना, उतना, बहुत, थोड़ा, खूब, बिलकुल, प्रर्याप्त, बस, काफी, लगभग, केवल, थोड़ा-सा आदि। परिणामवाचक क्रियाविशेषण जानने के लिए प्रश्नवाचक शब्द है: कितना।



2. संबंधबोधक

जो शब्द वाक्य के किसी संज्ञा या सर्वनाम का किसी दूसरे संज्ञा या सर्वनाम शब्द से संबंध बताते हैं, उन्हें संबंधबोधक कहते हैं।
1. बिल्ली मेज़ के नीचे बैठी है।
3. मेज़ के ऊपर एक पुस्तक है।
2. टोकरी के भीतर कुछ फल हैं।
4. टोकरी के बाहर आम है।

ऊपर दिए गए वाक्यों में के नीचे’, के ऊपर’ शब्दों से ‘बिल्ली’ और ‘पुस्तक’ का संबंध मेज़ से बताया गया है। इसी प्रकार आम और कुछ फलों का संबंध टोकरी से बताने के लिए ‘के भीतर’ और ‘के बाहर’ शब्दों का प्रयोग किया गया है। अतः ‘के नीचे’, ‘के ऊपर’, ‘के भीतर’, ‘के बाहर’ संबंधबोधक शब्द हैं।

कुछ संबंधबोधक शब्द:

के ऊपर, के अंदर, के बाद, की तरह, के नीचे, के भीतर, के आगे, की तरफ, के बाहर, के मारे, की ओर आदि।

3. समुच्चयबोधक

जो शब्द दो शब्दों, वाक्यांशों, वाक्यों या उपवाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक कहते हैं।
उद्धाहरण:
1. राहुल और रोहित खेलने जा रहे हैं।
2. आम अधिक मीठा है अथवा सेब?
3. लता तथा शीला अपस में बहनें हैं।

इन वाक्यों में ‘और’, ‘अथवा’, ‘तथा’ शब्द दो शब्दों अथवा वाक्य-खंडों को जोड़ते हैं। अतः ये योजक अथवा समुच्चयबोधक शब्द कहलाते हैं।
कुछ अन्य योजक शब्दः परंतु, या, यद्यनि, तथापि, कि, क्योंकि, चूकि, ताकि, जोकि, अन्यथा, किंतु, एवं, मगर, व, इसलिए, लेकिन, बल्कि, पर आदि।

अव्यय/अविकारी शब्द से आप क्या समझते हैं?

अव्यय का शाब्दिक अर्थ होता है: जो व्यय न हो। जिनके रूप में लिंग , वचन , पुरुष , कारक , काल आदि की वजह से कोई परिवर्तन नहीं होता उसे अव्यय शब्द कहते हैं। अव्यय शब्द हर स्थिति में अपने मूल रूप में रहते हैं। इन शब्दों को अविकारी शब्द भी कहा जाता है।
जैसे :- जब , तब , अभी ,अगर , वह, वहाँ , यहाँ , इधर , उधर , किन्तु , परन्तु , बल्कि , इसलिए , अतएव , अवश्य , तेज , कल , धीरे , लेकिन , चूँकि , क्योंकि आदि।

अविकारी शब्द कितने प्रकार के होते हैं? क्रियाविशेषण को उद्धाहरण सहित समझाइये।

अविकारी शब्द चार प्रकार के होते हैं:
(i). क्रियाविशेषण
(ii). संबंधबोधक
(iii). समुच्चयबोधक
(iv). विस्मयादिबोधक
क्रियाविशेषण: जो शब्द क्रिया के काल, स्थान, रीति, परिमाण आदि विशेषताएँ बताते हैं, उन्हें क्रियाविशेषण कहते हैं। जो शब्द क्रिया की विशेषता बताएँ उन्हें क्रियाविशेषण कहते हैं। जैसे:
(i). घोड़ा तेज़ दौड़ रहा है।
(ii). प्रिया रोज़ पढ़ती है।
इन वाक्यों मे तेज, रोज तथा ऊपर शब्द क्रिया के समय, स्थान तथा रीती बता रहे हैं। क्रिया की विशेषता बताने के कारण ये शब्द क्रियाविशेषण कहलाते हैं।

समुच्चयबोधक शब्द क्या हैं? उद्धाहरण सहित स्पष्ट कीजिये।

जो शब्द दो शब्दों, वाक्यांशों, वाक्यों या उपवाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक कहते हैं।
उद्धाहरण:
1. राहुल और रोहित खेलने जा रहे हैं।
2. आम अधिक मीठा है अथवा सेब?
3. लता तथा शीला अपस में बहनें हैं।
इन वाक्यों में ‘और’, ‘अथवा’, ‘तथा’ शब्द दो शब्दों अथवा वाक्य-खंडों को जोड़ते हैं। अतः ये योजक अथवा समुच्चयबोधक शब्द कहलाते हैं।

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