Class 8 Hindi Grammar Chapter 16 उपसर्ग एवं प्रत्यय

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कक्षा 8 हिन्दी व्याकरण पाठ 16 उपसर्ग एवं प्रत्यय

कक्षा: 8हिन्दी व्याकरण
अध्याय: 16उपसर्ग एवं प्रत्यय

उपसर्ग किसे कहते हैं?

वे शब्दांश जो किसी मूल शब्द के पूर्व जुड़कर अन्य विशेष अर्थ प्रकट करने वाले नए शब्द का निर्माण करते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं। भाषा में शब्दों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। शब्दों के माध्यम से ही भाषा का जीवन चलता है। शब्द-निर्माण की दृष्टि से शब्दों को दो श्रेणियों में रखा जाता है:

    • 1. मूल शब्द
    • 2. व्युत्पन्न शब्द




मूल शब्द

मूल शब्द, रूढ़ शब्द ही है। व्युत्पन्न शब्द मुख्यतः उपसर्ग और प्रत्यय के योग से बनते हैं। उपसर्ग और प्रत्यय शब्द नहीं वरन् शब्दांश हैं। इस शीर्षक के अंतर्गत उपसर्ग, प्रत्यय और समास से बने शब्दों की रचना प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।
उपसर्ग वे वाक्यांश जो मूल शब्द (संज्ञा, विशेषण आदि) के पहले जुड़ते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं। इनके योग से अर्थ में विशेषता आ जाती है। जैसे-

मूल शब्दउपसर्गव्युत्पन्न (यौगिक) शब्द
दानआदान
दानप्रप्रदान
ज्ञानविविज्ञान
गुणअवअवगुण

उपसर्गों को चार भागों में विभक्त किया जा सकता है:

    1. संस्कृत के उपसर्ग
    2. हिंदी के उपसर्ग
    3. उर्दू के उपसर्ग
    4. उपसर्ग के समान प्रयुक्त किए जाने वाले संस्कृत के अव्यय
संस्कृत के उपसर्ग
उपसर्गअर्थउदाहरण
नहीं, अभावअज्ञान, अभाव, अधर्म, असमय
अपबुरा, हीनअपवाद, अपमान, अपयश, अपकार
अवबुरा, नीचेअवनति, अवतरण, अवगुण, अवतार
अतिअधिक, ऊपरअतिरिक्त, अत्यंत, अतिकाल, अत्याचार
हिंदी के उपसर्ग
उपसर्गअर्थउदाहरण
अधआधाअधपका, अधमरा, अधजल, अधकचरा
अनरहितअनपढ़, अनबन, अनमोल, अनजान
रहितऔढर, औगुन, औतार, औघट
निरहितनिकम्मा, निडर, निहत्था, निखटू




अरबी-फारसी के उपसर्ग
उपसर्गअर्थउदाहरण
कमथोड़ाकमउम्र, कमबढ़त, कमजोर, कमसमझ
गैरनिषेधगैरमुल्क, गैरहाजिर, गैरकौम
खुशअच्छाखुशबू, खुशदिल, खुशमिजाज
दरमेंदरअसल, दरहकीकत
उपसर्ग की तरह प्रयोग होने वाले संस्कृत अव्यय
उपसर्गअर्थउदाहरण
अननिषेधअनर्थ, अनागत, अनादि
अधःनीचेअधःपतन, अधोमुख, अधोगति
अंतरअंदरअंतरात्मा, अंतर्राष्ट्रीय, अंतर्षांतीय
बहिबाहरबहिर्मुख, बहिर्गमन

प्रत्यय

ऐसे शब्द या शब्दांश जो किसी शब्द के अंत में लगकर उस शब्द के अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं, प्रत्यय कहलाते हैं। प्रत्ययों से नए शब्द बनते हैं। जैसे- सब्जी + वाला = सब्जीवाला, दुकान + दार = दुकानदार सब्जी शब्द के अंत में “वाला” प्रत्यय लगने से नया शब्द “सब्जीवाला” बना। इसी प्रकार दुकान शब्द के अंत में “दार” प्रत्यय लगकर नया शब्द “दुकानदार” बना।

प्रत्यय के भेद

प्रत्यय मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं:

    1. कृत् प्रत्यय (क्रिया शब्दों में लगने वाले)
    2. तद्धित प्रत्यय (क्रिया से भिन्न शब्दों में लगने वाले)
कृत् प्रत्यय

जो प्रत्यय क्रिया के मूल रूप अर्थात् धातु के अंत में जुड़कर संज्ञा तथा विशेषण शब्दों की रचना करते हैं, उन्हें कृत् प्रत्यय कहा जाता है। कृत् प्रत्यय क्योंकि शब्द के अंत में लगते हैं, इसलिए इन्हें कृदंत (कृत् + अंत) भी कहा जाता है।

(क) भाववाचक संज्ञा बनाने वाले कृत् प्रत्यय
प्रत्ययमूल शब्दभाववाचक संज्ञाएँ
अंतभिड़, गढ़, लड़भिड़त, गढ़त, लड़त
छाय, घेरछाया, घेरा
आईपढ़, लिख, जुतपढ़ाई, लिखाई, जुताई
आनथक, मिल, लग, चढ़थकान, मिलान, लगान, चढ़ान
(ख) कर्ता का बोध कराने वाले कृत्
प्रत्ययमूल शब्दकर्तृवाचक संज्ञाएँ
अक्पाठ, गा, वाचपाठक, गायक, वाचक
आकूलड़, पढ़लड़ाकू, पढ़ाकू
आकतैर, चालतैराक, चालाक
आलूझगड़झगड़ालू
(ग) करणवाचक संज्ञा बनाने वाले कृत्
प्रत्ययमूल शब्दकरणवाचक संज्ञाएँ
भूल, घेर, ठेल, झूलभूला, घेरा, ठेला, झूला
रेत, फाँसरेती, फाँसी
झाड़, ढक, बेलझाड़न, ढक्कन, बेलन
नीमथ, धौंक, चलमथनी, चलनी, धौंकनी
(घ) विशेषण बनाने वाले कृत् प्रत्यय
प्रत्ययमूल शब्दविशेषण
अनीयनिंद, पठनिंदनीय, पठनीय
आलुकृप, दया, श्रद्धाकृपालु, दयालु, श्रद्धालु
आऊटिक, खाटिकाऊ, खाऊ
ऐरालूटलुटेरा

तद्धित प्रत्यय

जो प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम अथवा विशेषण के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं, उन्हें तद्धित प्रत्यय कहते हैं।



(क) भाववाचक संज्ञा बनाने वाले तद्धित प्रत्यय
प्रत्ययमूल शब्दभाववाचक संज्ञाएँ
आईचतुर, बुरा, भलाचतुराई, बुराई, भलाई
आपाबूढा, मोटाबुढ़ापा, मोटापा
आसमीठा, खट्ठामिठास, खटास
आहटकड़वा, गरम, चिकनाकड़वाहट, गरमाहट, चिकनाहट
(ख) कर्तृवाचक संज्ञा बनाने वाले तद्धित प्रत्यय
प्रत्ययमूल शब्दकर्तृवाचक संज्ञाएँ
आरकुंभ, लोहा, सोनाकुम्हार, लुहार, सुनार
वालाचूड़ी, फल, घरचूड़ीवाला, फलवाला, घरवाला
कारकला, कथा, पत्रकलाकार, कथाकार, पत्रकार
एरासाँप, लूट, चितसपेरा, लुटेरा, चितेरा
(ग) विशेषण बनाने वाले तद्धित प्रत्यय
प्रत्ययमूल शब्दविशेषण
आलुदया, झगड़ादयालु, झगडालु
इतपुष्प, फल, हर्षपुष्पित, फलित, हर्षित
धन, लोभ, जंगलधनी, लोभी, जंगली
ईनरंग, कुलरंगीन, कुलीन

दूसरी भाषाओं से आए प्रत्यय

(क) संस्कृत के कुछ तद्धित प्रत्यय
प्रत्ययमूल शब्दनिर्मित शब्द
अकरक्षा, लेख, भक्ष, धावरक्षक, लेखक, भक्षक, धावक
त्वलघु, महत, स्व, आत्मलघुत्व, महत्व, स्वत्व, आत्मत्व
तालघु, महत्, गुरु,लघुता, महत्ता, गुरुता



(ख) उर्दू (अरबी-फारसी) से आए कुछ प्रत्यय
प्रत्ययमूल शब्दनिर्मित शब्द
नाकदर्द, शर्म, खतरदर्दनाक, शर्मनाक, खतरनाक
दारसमझ, माल, कर्जसमझदार, मालदार, कर्जदार
दानीचूहा, मच्छरचूहादानी, मच्छरदानी
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