Class 8 Hindi Grammar Chapter 4 हिंदी वर्तनी विचार

Class 8 Hindi Grammar Chapter 4 हिंदी वर्तनी विचार (Hindi Vartani Vichar). Class 8 Hindi Vyakaran is updated for academic session 2021-2022. Get here the examples and explanation about Spellings in Hindi Grammar which are known as हिंदी वर्तनी विचार, to prepare for school unit tests or terminal exams.

कक्षा 8 हिन्दी व्याकरण पाठ 4 हिन्दी वर्तनी विचार

कक्षा: 8 हिन्दी व्याकरण
अध्याय: 4 हिन्दी वर्तनी विचार

हिंदी वर्तनी विचार

परिभाषा: शब्दों में प्रयुक्त वर्णों के व्यवस्थित क्रम को वर्तनी कहते हैं। शब्दों में आए वर्ण एक विशेष क्रम में प्रयुक्त होने पर किसी-न-किसी अर्थ को प्रकट किया करते हैं। इसी प्रकार भाषा में प्रयुक्त दूसरे शब्द भी अपनी अलग पहचान रखते हैं। हम अपने विचारों का आदान-प्रदान बोलकर या लिखकर करते हैं। बोलने के लिए हम अपने मुँह से निकली ध्वनियों का प्रयोग करते हैं। जबकि लिखने के लिए लिपि का। मौखिक रूप को सुरक्षित रखने के लिए लिपि चिह्नों की आवश्यकता हुई। इन लिपि-चिह्नों को व्यवस्थित किया गया। ये लिपि-चिह्न वर्ण ही हैं।




लिपि चिह्नों का वर्गीकरण

    1. मूल लिपि चिह्न
    2. संयुक्त लिपि चिह्न
    3. मात्रा लिपि चिह्न
    4. विशिष्ट लिपि चिह्न
मूल लिपि चिह्न

इसमें वर्णमाला के सभी स्वर तथा व्यंजन आते हैं। “अ” से “औ” तक सभी स्वर और “क” से “ह” तक सभी व्यंजन मूल लिपि चिह्न हैं।

संयुक्त लिपि चिह्न

इसमें केवल संयुक्त व्यंजनों के लिपि चिह्न आते हैं, यथा- क्ष, त्र, ज्ञ, क्र, प्र, श्र, द्र, ग्र आदि।

मात्रा लिपि चिह्न

वर्तनी के इन चिह्नों में सभी मात्राएँ आती हैं।

विशिष्ट लिपि चिह्न

इसमें (तीनों अयोगवाह) अनुस्वार, अनुनासिक तथा विसर्ग (:) आते हैं। इसके अतिरिक्त इसमें कुछ विदेशी चिह्न भी सम्मिलित हैं। अंग्रेजी का “ऑ” तथा उर्दू (अरबी, फारसी) का नुक्ता (.) भी हिंदी की वर्तनी में आते हैं।

वर्तनी संबंधी अशुद्धियाँ

1. अ – आ विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
अहार आहार
अजादी आजादी
अगामी आगामी
अलोचना आलोचना
बारात बरात
नराज नाराज




2. इ – ई विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
हानी हानि
उन्नती उन्नति
परिक्षा परीक्षा
निर्दयी निर्दय
दिपावली दीपावली
3. उ – ऊ विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
गुरू गुरु
कृपालू कृपालु
रुप रूप
साधु साधू
प्रभू प्रभु
पुजनीय पूजनीय
4. ऋ – रि विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
रिषि ऋषि
श्रंगार शृंगार
घ्रणा घृणा
क्रिपा कृपा
त्रिप्त तृप्त
कृया क्रिया



5. ए – ऐ विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
एनक ऐनक
सैना सेना
सेनिक सैनिक
नैन नयन
देनिक दैनिक
चाहिये चाहिए
6. ओ – औ विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
पोधा पौधा
न्यौता न्योता
ओद्यौगिक औद्योगिक
ओषधालय औषधालय
मोखिक मौखिक
भोगौलिक भौगोलिक
7. अनुस्वार (-) – अनुनासिक (-) विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
सन्सार संसार
बांसुरी बाँसुरी
कँगन कंगन
ऊंगली
दिनाँक दिनांक
हंसमुख हँसमुख



8. विसर्ग (:) संबंधी अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
अत अतः
मनोस्थिति मन:स्थिति
निसंतान नि:संतान
मूलत मूलतः
मन:दशा मनोदशा
अंतपुर अंतःपुर
9. पंचमाक्षर संबंधी अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
कन्ठ कंठ
भन्डार भंडार
कन्गन कंगन
सम्वाद संवाद
अंय अन्य
10. व-ब संबंधी अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
नबाब नवाब
बन वन
ब्रत व्रत
बृक्ष वृक्ष
बाणी वाणी
बस्तु वस्तु
11. अल्पप्राण-महाप्राण विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
झूट झूठ
धोका धोखा
कनिष्ट कनिष्ठ
जूटन जूठन
हिंदुस्थान हिंदुस्तान
धंदा धंधा
12. श-ष-स विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
परिशद् परिषद्
प्रशंशा प्रशंसा
अमावश्या अमावस्या
नमश्कार नमस्कार
शाशन शासन
शुषमा सुषमा
13. ज्ञ-ग्य विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
योज्ञ योग्य
प्रतिग्या प्रतिज्ञा
विग्यान विज्ञान
कृतग्य कृतज्ञ
ग्यान ज्ञान
14. य – ज विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
जोग्य योग्य
जजमान यजमान
जज्ञ यज्ञ
जमराज यमराज
अजोध्या अयोध्या
जोग योग




15. अनावश्यक स्वर/ व्यंजन जोड़ने की अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
इस्थिति स्थिति
इस्टेशन स्टेशन
सौहाद्र सौहार्द्र
श्राप शाप
स्वास्थय स्वास्थ्य
सकूल स्कूल
16. छ – च्छ – क्ष विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
लच्छण लक्षण
छत्रिय क्षत्रिय
आकांछा आकांक्षा
नच्छत्र नक्षत्र
छमा क्षमा
लच्छमण लक्ष्मण
17. रेफ़ की अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
तीर्व तीव्र
कर्मधार्य कर्मधारय
सार्मथ्य सामर्थ्य
आर्शीवाद आशीर्वाद
नर्क नरक
प्रमात्मा परमात्मा
18. संधि विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
महिन्दर महेंद्र
उतपात उत्पात
जगतगुरु जगदगुरु
सन्मुख सम्मुख
उपरोक्त उपर्युक्त
19. यी – ई, ये – ए विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
जाइये जाइए
चाहिये चाहिए
स्थाई स्थायी
जायें जाएँ
जाये जाए
आयी आई

20. द्य (द्य)- ध्य – ध विषयक अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
खाध्य खाद्य
पध्य पद्य
विध्या विद्या
उध्यान उद्यान
21. अन्य अशुद्धियाँ
अशुद्ध शुद्ध
पूज्यनीय पूजनीय
शमशान श्मशान
इंद्रा इंदिरा
महत्त्व महत्व
श्रृंगार शृंगार
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