Class 8 Hindi Grammar Chapter 8 कारक

Class 8 Hindi Grammar Chapter 8 कारक (Karak). Here, we will study about कारक and कारक ke bhed with examples and explanation updated for session 2020-2021.

Practice here with examples and definitions related to various terms of Karak. Study about all eight types of karak with suitable examples.

कक्षा 8 हिन्दी व्याकरण पाठ 8 कारक के भेद

कक्षा: 8हिन्दी व्याकरण
अध्याय: 8कारक के भेद

संज्ञा के विकार – कारक

संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य के किसी दूसरे शब्द के साथ उसका संबंध जाना जाए, वह कारक कहलाता है। संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के साथ ने, को, से, का में आदि जो चिह्न प्रयुक्त होते हैं, विभक्ति कहलाते हैं।
जैसे: कुरुक्षेत्र के मैदान में पांडवों ने न्याय के लिए कौरवों के साथ युद्ध किया। इस वाक्य में के, में, ने, के लिए, शब्द हैं। ये सभी कारक चिह्न हैं। इन्हें विभक्ति कहते हैं।
कारक के भेद
हिंदी में कारक निम्नलिखित आठ प्रकार के होते हैं:

    • 1. कर्ता कारक
    • 2. कर्म कारक
    • 3. करण कारक
    • 4. संप्रदान कारक
    • 5. अपादान कारक
    • 6. संबंध कारक
    • 7. अधिकरण कारक
    • 8. संबोधन कारक




कारक-तालिका

कारककारक चिह्न (विभक्तियाँ)
कर्ताने, (कोई चिह्न नहीं)
कर्मको, (कोई चिह्न नहीं)
करणसे, के द्वारा
संप्रदानको, के लिए
अपादानसे (पृथक् होने के अर्थ में)
संबंधका, के, की, रा, रे, री, ना, ने, नी
अधिकरणमें, पर
संबोधनहे, अरे, रे, अजी, अरी, ओ, ए

कारकों की पहचान

वाक्यों में प्रयुक्त कारकों की पहचान के लिए यहाँ तालिका दी गई है। इस तालिका से हम कारकों की पहचान सरलता से कर सकते हैं।

क्रिया के साथ पूछे जाने वाले प्रश्नउत्तर में मिलने वाला कारक
कौन/ किसने /किन्होंने?कर्ता
किसे/ क्या/ किसको / किनको/ कहाँ ?कर्म
किससे/ किसके द्वारा/ किनके द्वारा?करण
किसके लिए/ किनके लिए/ किसे/ किसको/ किनको?संप्रदान
कहाँ से/ किस से/ किन से?अपादान
किसका/ किसकी/ किसके/ किनका/ किनकी/ किनके?संबंध
किसमें/ किनमें/ किस पर/ किन पर?अधिकरण
जिसे पुकारा या संबोधित (या सचेत) किया जाएसंबोधन
कर्ता कारक

जिससे क्रिया करने वाले का बोध होता है, उसे कर्ता कारक कहते हैं। (विभक्ति चिह्न “ने”)

    • क. रोहित क्रिकेट खेलता है।
    • ख. मीना ने गीत गाया।

इन वाक्यों में “खेलता है”, “गाया” क्रियाएँ हैं। रोहित, मीना और बालकों क्रमशः इन क्रियाओं को करने वाले हैं।




कर्म कारक

परिभाषाः जिस शब्द पर क्रिया के कार्य (काम/व्यापार) का फल (प्रभाव) पड़े, उसे कर्म कारक कहते हैं। (विभक्ति चिह्न “को”)

    • क. राम ने रावण को मारा।
    • ख. छवि पत्र लिखती है।

इन वाक्यों में “मारा”, “लिखती” क्रियाएँ हैं। रावण, पत्र और विद्यालय पर क्रमशः इन क्रियाओं का प्रभाव पड़ रहा है।

करण कारक

कर्ता जिसकी सहायता से क्रिया करता है, उसे करण कारक कहते हैं। (विभक्ति चिह्न “से” या “द्वारा”)

    • क. नियोनिका कलम से पत्र लिखती है।
    • ख. शिकारी ने चीते को बंदूक से मारा।

इन वाक्यों में “लिखती है”, “मारा” क्रियाएँ हैं। इन क्रियाओं को क्रमशः “कलम से”, “बंदूक से” के द्वारा किया जा रहा है।

संप्रदान कारक

जिसके लिए क्रिया की जाती है, उसका बोध कराने वाले संज्ञा अथवा सर्वनाम के रूप को संप्रदान कारक कहते हैं। (विभक्ति चिह्न “को” या “के लिए”)

    • क. सूरज के लिए फल लाओ।
    • ख. पिताजी माँ के लिए साड़ी लाए।

इन वाक्यों में क्रमशः दो क्रियाएँ हैं- “लाओ”, “लाए” । ये क्रियाएँ इन वाक्यों के कर्ताओं ने जिनके लिए की हैं, वे क्रमशः सूरज और माँ हैं।

अपादान कारक

संज्ञा के जिस रूप से पृथक् (अलग) होने का बोध हो, उसे अपादान कारक कहते हैं। (विभक्ति चिह्न-“से”)

    • क. विद्यार्थी स्कूल से आते हैं।
    • ख. पतंग बच्चे के हाथ से छूट गई।

उपर्युक्त वाक्यों की (क्रमशः) क्रियाएँ हैं- “आते हैं”, “छूट गई” ये क्रियाएँ अलग होने के अर्थ में हैं।

संबंध कारक

संज्ञा के जिस रूप से एक वस्तु या पदार्थ का दूसरी वस्तु या पदार्थ से संबंध का बोध हो, उसे संबंधकारक कहते हैं। (विभक्ति चिह्न “का, की, के, रा, री, रे”)

    • क. यह मयंक का घर है।
    • ख. यह राज की कार है।

इन वाक्यों में “मयंक का घर”, “राज की कार” से संबंध का बोध हो रहा है। अतः इन वाक्यों में अमित, राज और हिंदी संबंधकारक हैं।

अधिकरण कारक

संज्ञा के जिस रूप से क्रिया के आधार का बोध हो, उसे अधिकरण कारक कहते हैं। (विभक्ति चिह्न “में”, “पर”)

    • क. आम में मिठास होती है।
    • ख. रेखा छत पर बैठी है।

इन वाक्यों की क्रियाओं के क्रमशः आधार हैं- “आम”, “छत” ये अधिकरण कारक हैं।




संबोधन कारक

संज्ञा के जिस रूप से किसी को पुकारने या सावधान करने का बोध होता है, उसे संबोधन कारक कहते हैं। संबोधन कारक- संबोधन चिह्न- (!)

    • क. हे प्रभो! सभी का भला करो।
    • ख. हाय ! मैं लुट गया।

संबोधन कारकों का प्रयोग वाक्य के प्रारंभ में होता है।

करण कारक तथा अपादान कारक में अंतर

इन दोनों कारकों का विभक्ति-चिह्न “से” है, परंतु करण कारक के “से” चिह्न का अर्थ “सहायता” या द्वारा होता है जबकि अपादान कारक का चिह्न “से” पृथकता को प्रकट करता है। जैसे-

करण कारकअपादान कारक
सुषमा कलम से लिखती है।खान से कोयला निकलता है।
वह रेल से मुंबई गया।वह मुंबई से वापस आ गया।
नियोनिका कलम से पत्र लिखती है।विद्यार्थी स्कूल से आते हैं।
शिकारी ने चीते को बंदूक से मारा।पतंग बच्चे के हाथ से छूट गई।

कर्म कारक और संप्रदान कारक में अंतर

कर्म कारक में जिस शब्द के साथ “को” जुड़ा होता है, उस पर क्रिया का फल पड़ता है। संप्रदान कारक के चिह्न “को” का अर्थ “के लिए” या “के वास्ते” होता है। जैसे-

कर्म कारक संप्रदान कारक
हरीश सुरेश को गणित पढ़ा रहा है।गरीबों को भोजन दे दो। (गरीबों के लिए)
गुरु जी को प्रणाम करो।वहाँ पहनने को कपड़े भी नहीं मिले। (पहनने के लिए)
राम ने रावण को मारा।सूरज के लिए फल लाओ।




संज्ञा-शब्दों के सब विभक्तियों में रूप

संज्ञा-शब्दों के रूप लिंग और वचन के अनुसार कारकों में परिवर्तित हो जाते हैं। यही रूप-परिवर्तन रूप-रचना कहलाता है।

आकारांत पुल्लिग शब्द “लड़का”
कारकएकवचनबहुवचन
कर्तालड़का, लड़के नेलड़कों ने
कर्मलड़के कोलड़कों को
करणलड़के से, के द्वारालड़कों से, के द्वारा
संप्रदानलड़के को, के लिएलड़कों को, के लिए
अपादानलड़के से (पृथकता)लड़कों से (पृथकता)
संबंधलड़के का, के, कीलड़कों का, के, की
अधिकरणलड़के में, परलड़कों में, पर
संबोधनहे लड़के!हे लड़को!
इकारांत पुल्लिग शब्द “हाथी”
कारकएकवचनबहुवचन
कर्ताहाथी, हाथी नेहाथी, हाथियों ने
कर्महाथी कोहाथियों को
करणहाथी से, के द्वाराहाथियों से, के द्वारा
संप्रदानहाथी को, के लिएहाथियों को, के लिए
अपादानहाथी से (पृथकता)हाथियों से (पृथकता)
संबंधहाथी का, के, कीहाथियों का, के, की
अधिकरणहाथी में, परहाथियों में, पर
संबोधनहे हाथी!हे हाथियो!
बहुवचन अकारांत स्त्रीलिंग शब्द “बहन”
कारकएकवचनबहुवचन
कर्ताबहन, बहन नेबहनें, बहनों ने
कर्मबहन कोबहनों को
करणबहन से, के द्वाराबहनों से, के द्वारा
संप्रदानबहन को, के लिएबहनों को, के लिए
अपादानबहन से (पृथकता)बहनों से (पृथकता)
संबंधबहन का, के, कीबहनों का, के, की
अधिकरणबहन में, परबहनों में, पर
संबोधनहे बहन!हे बहनो!



ईकारांत स्त्रीलिंग शब्द “सखी”
कारकएकवचनबहुवचन
कर्तासखी, सखी नेसखियाँ, सखियों ने
कर्मसखी, सखी कोसखियों को
करणसखी से, के द्वारासखियों से, के द्वारा
संप्रदानसखी को, के लिएसखियों को, के लिए
अपादानसखी से (पृथकता)सखियों से पृथकता
संबंधसखी का, के, कीसखियों का, के, की
अधिकरणसखी में, परसखियों में, पर
संबोधनहे सखी!हे सखियो!
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