Class 8 Hindi Grammar Chapter 24 मौखिक अभिव्यक्ति

Class 8 Hindi Grammar Chapter 24 मौखिक अभिव्यक्ति (Maukhik Abhivyakti). Hindi Vyakaran contents are updated according to CBSE and State Board curriculum 2020-2021.

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कक्षा 8 हिन्दी व्याकरण पाठ 24 मौखिक अभिव्यक्ति

कक्षा: 8हिन्दी व्याकरण
अध्याय: 24मौखिक अभिव्यक्ति

मौखिक अभिव्यक्ति से आप क्या समझते हैं?

मनुष्य भाषा के मौखिक रूप का सबसे अधिक प्रयोग करता है। संसार में आजकल हर व्यक्ति के संपर्क संबंध इतने अधिक बढ़ गए हैं कि उसे मित्रों और सामाजिक कार्यक्रमों तथा अनेक अवसरों पर मिलने पर भिन्न-भिन्न तरह की बातचीत करनी पड़ती है। इसमें वही व्यक्ति सफल है जो संवाद और भाषा में निपुण होते हैं क्योंकि हर अवसर पर भाषा का रूप अलग-अलग तरह का होता है। विवाह समारोहों में प्रयोग होने वाले शब्द, मृत्यु अथवा अन्य दु:ख के अवसरों पर प्रयुक्त नहीं होते। अवसर के अनुसार उचित संवाद या भाषा का प्रयोग करके व्यक्ति दूसरों को प्रभावित कर सकता। लिखित अभिव्यक्ति की तरह ही मौखिक अभिव्यक्ति के भी मूलतः दो प्रकार हैं:

    • 1. अनौपचारिक मौखिक अभिव्यक्ति
    • 2. औपचारिक मौखिक अभिव्यक्ति




अनौपचारिक मौखिक अभिव्यक्ति

अनौपचारिक मौखिक अभिव्यक्ति का अर्थ है, अपने सुपरिचित और निकट संबंधियों के बीच में होने वाला वार्तालाप। सामान्यतः सभी बालक विद्यालय में आने से पहले अपने घरों में अपने माता-पिता, दादा-दादी, भाई-बहन तथा मित्रों व पड़ोसियों के साथ अनौपचारिक बातचीत करना सीख चुके होते हैं। विद्यालय में वे अपने सहपाठियों और मित्रों के साथ भी अनौपचारिक वार्तालाप करते हैं।

2. औपचारिक मौखिक अभिव्यक्ति

औपचारिक मौखिक अभिव्यक्ति के अनेक रूप हैं जिनमें से कुछ के नमूने आगे दिए हैं। औपचारिक अभिव्यक्ति के समय हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

    • 1. संवाद की भाषा सभ्य और शिष्टतापूर्ण हो।
    • 2. आत्म प्रशंसा नहीं करना चाहिए।
    • 3. दूसरे व्यक्ति के स्तर के अनुसार बातचीत करें।
    • 4. हास-परिहास केवल मित्रों तथा सगे-संबंधियों तक ही सीमित रखें, अन्य अवसरों पर न करें।
    • 5. व्यंगात्मक भाषा का प्रयोग न करें।
    • 6. वाद-विवाद प्रतियोगिता में समय सीमा का ध्यान रखें।
बधाई देना
बधाई देना

आज के समय में आदमी अपने काम में इतना व्यस्त रहता है कि सामाजिक कार्यों में चाहकर भी अपना योगदान नहीं दे सकता। परंतु कुछ सामाजिक कार्य जैसे-सुख, दुख इत्यादि में उसको समय निकाल कर जाना ही पड़ता है। किसी सगे-संबंधी को खुशी के अवसर पर उसे बधाई देकर आप उसका मन जीत सकते हैं। बधाई देने के लिए केवल बधाई शब्द ही काफी नहीं है, अपितु इसके लिए आपको हाव-भाव भी प्रकट करने चाहिए। जैसे: अवस्था के अनुसार गले मिलना, हाथ मिलाना, पाँव छूना, चूमना इत्यादि।
खुशी के अवसरों पर बधाई देने के लिए कुछ विशेष शब्द और वाक्य इस प्रकार हैं:

    1. आपको बहुत-बहुत बधाई।
    2. भगवान आपको और खुशियाँ दें।
    3. आपको जन्मदिन मुबारक हो।
    4. दीवाली की शुभकामनाएँ।




अतिथि का स्वागत

जिस व्यक्ति का आप स्वागत कर रहे हो, उसका पूरा नाम और पता होना चाहिए तथा उसका स्वागत मुस्कराहट के साथ और विनम्र भाव से करना चाहिए। स्वागत करते समय व्यक्ति की उम्र, रिश्ते आदि को ध्यान रखकर मिलना चाहिए। जैसे- किसी से गले मिलना, हाथ मिलाना या पाँव छूना इत्यादि। स्वागत करते समय कुछ सम्मानपूर्ण शब्दों से व्यक्ति का सम्मान करना चाहिए। जैसे: आइए, बड़ी खुशी हुई, आपसे मिलकर मैं धन्य हो गया, लीजिए जी, कृपया इत्यादि।

धन्यवाद देना

कोई व्यक्ति आपका काम करता है और उसे आप उचित सम्मान नहीं देते या धन्यवाद नहीं कहते तो वह अशिष्टता कहलाता है। अतः उचित अवसर पर धन्यवाद करना हमारा मानवीय कर्तव्य है। धन्यवाद करने में प्रयोग होने वाले शब्द और वाक्य नीचे दिए गए हैं:

    1. बहुत-बहुत शुक्रिया।
    2. बहुत-बहुत धन्यवाद।
    3. आपका धन्यवाद कैसे करूँ।
    4. आपने सचमुच मुझे बचा लिया।

संवाद-लेखन

संवाद से तात्पर्य दो या दो से अधिक व्यक्तियों के मध्य किसी विषय पर वार्तालाप से है। वार्तालाप मानव-जीवन का अभिन्न अंग है। बिना वार्तालाप के मानव-जीवन की कल्पना भी मुश्किल है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तथा यह एक ऐसे समाज में रहता है, जहाँ सभी मनुष्य एक-दूसरे से इस प्रकार जुड़े हैं जैसे एक शरीर के विभिन्न अंग आपस में जुड़े रहते हैं। साहित्यिक दृष्टि से कहानी, नाटक तथा एकांकी आदि में संवाद का विशेष महत्त्व है या हम कह सकते हैं कि संवाद-लेखन किसी भी नाटक, एकांकी, चलचित्र आदि का प्राण है। यह अभिनय के सजीवता प्रदान कर कहानी को गति प्रदान करता है। संवाद में एक कलाकार उस प्रस्तुतिकरण पर अपने कथन के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करता है तथा दूसरा कलाकार उस प्रस्तुतिकरण पर अपने कथन के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करता है। इस प्रकार संवाद का क्रम आगे बढ़ता जाता है।




संवाद-लेखन में ध्यान देने योग्य महत्तवपूर्ण बातें:

    • 1. संवाद लिखते समय उसमें प्रयुक्त पात्रों की प्रकृति, देशकाल, उनकी शिक्षा तथा उनके जीवन का भलीभाँति ध्यान रखना चाहिए।
    • 2. संवाद की भाषा सरल तथा भावानुकूल हो।
    • 3. संवाद में वाक्य छोटे-छोटे तथा रोचक होने चाहिए।
    • 4. संवाद का अंत सदैव किसी निष्कर्ष के साथ होना चाहिए।
    • 5. संवाद का वाक्य संक्षिप्त होना चाहिए।
    • 6. संवाद के विषय में क्रमशः प्रकट करना चाहिए।
    • 7. संवाद में गति के साथ-साथ रोचकता भी बनी रहनी चाहिए।
    • 8. संवाद में यथास्थान मुहावरे तथा लोकोक्ति का प्रयोग भी करना चाहिए।

संवाद के कुछ उदाहरण:

माँ और बेटे की बीच वार्तालाप
माँबेटा
अरे, आ गए बेटा! आज तो तुमने बहुत देर कर दी।हाँ, माँ देर तो हो गई। आज इतिहास के अध्यापक ने छुट्टी के बाद रुकने को कहा था।
क्यों?क्योंकि वे चार-पाँच दिन की छुट्टी पर जाने वाले हैं। बच्चों का नुकसान न हो, इसलिए उन्होंने छुट्टी के बाद भी पढ़ाया था।
फिर तो ठीक है बेटा। तुम हाथ-मुँह धोकर खाना खा लो।भूख नहीं है माँ।
क्यों बेटा?वहीं स्कूल कैंटीन में सभी ने कुछ खा लिया था।
अच्छा खाना रख देती हूँ। भूख लगे तब खा लेना।ठीक है।
ग्राहक और दुकानदार के मध्य वार्तालाप



ग्राहकदुकानदार
आपके यहाँ नहाने के कौन-कौन से साबुन है?जी, लक्स, रेक्सोना, लाइफबॉय, लिरिल, पियर्स और भी बहुत हैं।
मुझे लक्स की दो टिक्की चाहिए। कितने पैसे दूँ?पचास रुपए। मैं आपकी क्या सहायता कर सकता हूँ?
रिफाइंड ऑयल है, आपके पास।जी हाँ, आपको कौन-सा रिफाइंड ऑयल चाहिए?
एक किलो फॉरचुन दे दीजिए। एक किलो चीनी भी चाहिए।ये लीजिए। ये रहा एक किलो रिफाइंड, एक किलो चीनी और सेवा बताइए।
ठीक है। मुझे आटा भी लेना था। क्या आप ये सारा सामान किसी लड़के के हाथ घर भिजवा देंगे?ठीक है। मुझे अपना पता दीजिए।
डी-7, ब्लॉक- एफ, विकासपुरी।कोई दिक्कत नहीं। आप पैसे दे दीजिए। मैं सारा सामान लड़के के हाथ घर भिजवा देता हूँ।
आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।जी ये मेरा काम है और कोई सेवा बताइए।
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