Class 8 Hindi Grammar Chapter 31 पत्र लेखन

Class 8 Hindi Grammar Chapter 31 पत्र लेखन (Patr Lekhan). Students of Class 8 find पत्र लेखन as an interesting topic in Hindi Grammar. Updated contents of Patr Lekhan are given here for academic session 2020-2021.

Practice format for formal and informal letters are given here to provide a better practice of पत्र लेखन in Hindi Vyakaran for class 8 CBSE. It also covers the state board syllabus for session 2020-2021.

कक्षा 8 हिन्दी व्याकरण पाठ 31 पत्र लेखन

कक्षा: 8हिन्दी व्याकरण
अध्याय: 31पत्र लेखन

पत्र लेखन से आप क्या समझते हैं?

पत्र-लेखन एक ऐसा साधन है जो दो हृदयों को जोड़ता है। इसके द्वारा हम एक-दूसरे के विचारों और समाचारों से अवगत होते हैं। इसका व्यवहार दो व्यक्तियोंज्ञ के बीच होता है। इसे भेजकर या पाकर हम दूर बैठे लोगों के साथ निकटता का अनुभव करते हैं। पत्र-लेखन में पारंगत लोग जीवन में विविध सफलताएँ अर्जित करते हैं। जबकि शब्दों के कुप्रयोग के कारण पत्र का असर उल्टा हो जाता है। अतः पत्र हमारे संबंधों को बनाने या बिगाड़ने में अच्छी भूमिका निभाता है। इसलिए पत्र लिखते समय हमें सावधान रहना चाहिए। पत्र मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:

    • 1. व्यक्तिगत पत्र
    • 2. व्यावसायिक पत्र
    • 3. सरकारी पत्र या प्रार्थना पत्र




विषय-भेद के अनुसार पत्र अनेक प्रकार के हो सकते हैं। जैसे- बधाई पत्र, परिचय पत्र, सूचना पत्र, निमंत्रण पत्र, धन्यवाद-पत्र, आवेदन पत्र, शिकायती पत्र आदि।

पत्र के प्रकार

विषय भेद के अनुसार पत्र अनेक प्रकार के हो सकते हैं। जैसे: बधाई पत्र, परिचय पत्र, सूचना पत्र, निमंत्रण पत्र, धन्यवाद-पत्र, आवेदन पत्र, शिकायती पत्र आदि।

पत्र-अंग
    • स्थान और तिथि-पत्र में दाईं ओर सबसे ऊपर भेजने वाले का पता तथा पत्र लिखने की तिथि होती है।
    • संबोधन-पत्र के प्रारंभ में बाईं ओर संबोधन शब्द लिखा जाता है। उसके लिए संबंध-विशेष, आयु अथवा पद के अनुसार संबोधन शब्द लिखा जाता है।
    • अभिवादन-संबोधन के नीचे यथायोग्य अभिवादन शब्द लिखा जाता है। व्यावसायिक पत्रों में अभिवादन शब्द नहीं लिखा जाता है।
    • मुख्य विषय या पत्र का कलेवर- इसमें मुख्य सामग्री अर्थात् समाचार, कुशल-क्षेम आदि होता है।
    • निवेदन शब्द- हस्ताक्षर से पहले यथानुसार निवेदन शब्द लिखा जाता है।
    • समाप्ति-पत्र के विषय की समाप्ति के बाद प्रायः कुछ शब्द या वाक्य लिखने की परंपरा है। जैसे- धन्यवाद आदि।
    • पता-पत्र के अंत में पाने वाले का पता लिखा जाता है।

विभिन्न प्रकार के पत्रों में प्रयोग किए जाने वाले संबोधन, अभिवादन व निवेदन शब्द नीचे दिए जा रहे हैं:

संबंधसंबोधन
बड़े संबंधियों को (पिता- गुरु आदि)मान्यवर, परम श्रद्धेय, श्रीमान् आदि।
छोटे संबंधियों को (छोटा भाई, पुत्र, भतीजा आदि)प्रिय, चिरंजीव नाम आदि।
बराबर वाले मित्र, साथी आदि कोप्रिय, मित्रवर,
परिचित व्यक्तियों कोमहाशय, महोदय, श्रीमान, श्रीमति आदि।
अधिकारियों कोश्रीमान्, महोदय, मान्यवर
पति कोप्राणनाथ, प्राण प्रिय आदि।
पत्नी कोप्राणप्रिय, प्रिय आदि।
प्रधानाचार्य कोश्रीमान् या महोदय।




संबंधअभिवादननिवेदन
बड़े संबंधियों कोनमस्कार, प्रणाम, चरणस्पर्शआपका आज्ञाकारी, कृपाकांक्षी
छोटे संबंधियों कोप्रसन्न रहो आदिशुभाकांक्षी, तुम्हारा शुभचिंतक, हितैषी आदि।
बराबर वाले मित्रनमस्ते, सप्रेम नमस्कारतुम्हारा मित्र, प्रेमाकांक्षी आदि।
परिचित व्यक्तिनमस्ते, नमस्कार आदिआपका या भवदीय।
अधिकारियों कोनमस्ते, नमस्कार आदिप्रार्थी, सेवक, निवेदक आदि
पति कोचरणस्पर्श, वंदना आदिआपकी, दासी, पत्नी, प्रिया आदि।
पत्नी कोप्रेमालिंगन, सप्रेम मिलन आदितुम्हारा जीवन-साथी।
प्रधानाचार्य कोनमस्तेआपका आज्ञाकारी छात्र।

ध्यान देने योग्य बातें

    1. पत्र जिसको लिखना है उससे संबंध और पद के अनुसार शिष्टाचार शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।
    2. पत्र का आरंभ व अंत बढ़िया होना चाहिए।
    3. पत्र में व्यर्थ बातें लिखने से बचना चाहिए।
    4. सरकारी पत्रों में अधिकारियों के नाम न लिखकर पद से संबोधित करना चाहिए।
    5. सरकारी पत्रों के आरंभ में पत्र का विषय लिखना चाहिए।
    6. पत्र में कहावतों, मुहावरों आदि के प्रयोग से बचना चाहिए।
1. अपने मित्र के जन्म दिवस पर उसे बधाई देते हुए एक पत्र लिखिए

73, सेक्टर-2, द्वारका तिथि: 28 अगस्त 20xx
नई दिल्ली।
प्रिय हिमांशु,
जन्मदिन मुबारक हो! तुम्हारा पत्र प्राप्त हुआ। पढ़कर मालूम हुआ कि तुम अपने जन्मदिन के उत्सव पर मुझे आमंत्रित करना चाहते हो। मैं इस शुभ अवसर पर अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ और ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि तुम जियो हजारों साल। प्रिय मित्र! मैं इस उत्सव में सम्मिलित नहीं हो पाऊँगा। क्योंकि पिताजी घर पर नहीं हैं अतः मैं कहीं जा नहीं सकता। इस पत्र के साथ मैं एक छोटा-सा उपहार भेज रहा हूँ। आशा है तुम इसे अवश्य स्वीकार करोगे। मेरी बधाई एक बार फिर स्वीकार करो। अपने माताजी और पिताजी को मेरी तरफ से प्रणाम कहना। हार्दिक शुभकामनाओं सहित !
तुम्हारा मित्र,
दीपक

2. अपने छोटे भाई को प्रातः भ्रमण के लाभ बताते हुए एक पत्र लिखिए

108, ब्लॉक-एफ, विकास पुरी, 3 जनवरी, 20xx
नई दिल्ली
प्रिय अनुज,
शुभाशीर्वाद आज तुम्हारा मित्र रोहित यहाँ आया था। उससे पता चला कि आजकल तुम बहुत आलस करने लगे हो। तुम सुबह बहुत देर से उठते हो। यह ठीक बात नहीं है। इससे तुम्हारे स्वास्थ्य एवं पढ़ाई दोनों पर असर पड़ सकता है। विद्यार्थी जीवन ही पूरी जिंदगी की आधारशिला होती है। शरीर का विशेष ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि स्वस्थ रहने पर ही तुम कुछ कर सकोगे। जो विद्यार्थी इस अवस्था में प्रतिदिन व्यायाम करने और प्रातः-भ्रमण करने की आदत डाल लेते हैं, वे जीवनभर नीरोग रहते हैं। प्रातः भ्रमण के तो लाभ-ही-लाभ हैं। इससे शरीर को स्वच्छ वायु मिलती है जिससे दिन भर ताजगी बनी रहती है। प्रातः काल की शीतल, मंद, सुगंधित वायु का सेवन शरीर में रक्त-संचार बढ़ाता है। इसके विपरीत जो प्रातः भ्रमण नहीं करते वे आलसी हो जाते हैं। उन्हें कई प्रकार के रोग लग जाते हैं। अतः प्रातः जल्दी उठकर भ्रमण का अभ्यास डालो। फिर तुम स्वयं उसके फायदे का अनुभव करोगे। आशा है, तुम मेरी सलाह मानोगे और प्रातः घूमने जाया करोगे। शेष मिलने पर।
तुम्हारा शुभाकांक्षी,
रमन

पोस्टमास्टर को एक पत्र लिखिए जिसमें डाकिए के विरुद्ध शिकायत की गई हो

सेवा में, तिथि- 5 मई, 20xx
मुख्य डाकपाल महोदय,
गोलडाकखाना, रामनगर
विषय- डाकिए के विरुद्ध शिकायती पत्र
मान्यवर,
निवेदन यह है कि मैं रामनगर का निवासी आपके द्वारा इस क्षेत्र में नियुक्त डाकिए के विरुद्ध आपका ध्यान आकर्षित करवाना चाहता हूँ। वह न तो नियमित रूप से डाक लाता है और न ही ठीक समय पर बाँटता है। वह आते-जाते व्यक्ति को सारे मोहल्ले की डाक पकड़ाकर चला जाता है। इसके कारण कई बार आवश्यक पत्र भी समय पर नहीं मिल पाते हैं। मुझे कल ऐसा पत्र मिला, जिसे एक सप्ताह पहले मिल जाना चाहिए था। मेरे एक मित्र का मनीऑर्डर डाकिए के पास आ चुका है, परंतु वह दो दिन से आया नहीं है। यह उसके आलस का प्रमाण है। उसे मैंने कई बार समझाया पर उसके कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। अतः आपसे प्रार्थना है कि इस डाकिए को बदलकर किसी अच्छे डाकिए को नियुक्त करने की कृपा करें। आपकी अतिकृपा होगी।
भवदीय,
सुरेश गर्ग
पता-ए-7 कृष्णा नगर, दिल्ली



प्रधानाध्यापक के पास अनुपस्थिति की सूचना देने के लिए प्रार्थना-पत्र लिखिए

सेवा में, 3 दिसंबर 20xx
श्रीमान् प्रधानाध्यापक महोदय,
आदर्श विद्या मंदिर, अंबाला
महोदय,
सेवा में विनम्र निवेदन है कि मैं कल अपने पिताजी के साथ मुंबई जा रहा हूँ। इसके कारण आगामी दस दिनों तक मैं अपनी कक्षा में उपस्थित नहीं हो सकूँगा। अतः श्रीमान् से प्रार्थना है कि दिनांक 04-12-20xx से 14-12-20xx तक मेरे अनुपस्थिति-दंड को माफ करें। इसके लिए मैं श्रीमान् का सदा आभारी रहूँगा।
धन्यवाद
आपका आज्ञाकारी शिष्य
सुरेश सिंह कक्षा
आठवीं, क्रमांक-3

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