Class 6 Hindi Grammar Chapter 13 वाच्य

Class 6 Hindi Grammar Chapter 13 वाच्य (Vachya). In this chapter of Hindi Vyakaran, we will study about कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य and भाववाच्य with examples and explanation.

This chapter is helpful for all the students of CBSE, UP Board, MP Board or other boards for the preparation of exams. Every term is well defined and explain with suitable example. Prepare about Hindi Vyakaran – Vachya for school terminal test or unit tests.

कक्षा 6 हिन्दी व्याकरण पाठ 13 वाच्य

कक्षा: 6हिन्दी व्याकरण
अध्याय: 13वाच्य

वाच्य किसे कहते हैं?

वाच्य

क्रिया के जिस रूपांतर से यह पता चले कि क्रिया द्वारा कही गई बात का विषय कर्ता है, कर्म है, या भाव उसे वाच्य कहते हैं।
निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए:
1. रोहित क्रिकेट खेलता है। रोहित ने क्रिकेट खेला।
2. माताजी फल खरीद रही हैं। माताजी से फल खरीदे जा रहे हैं।

ऊपर के वाक्यों में “खेलता है”, “खरीद रही है” आदि क्रिया के विभिन्न रूपों का विधान किया गया है। यह विधान व्याकरण में वाच्य कहलाता है।

वाच्य के भेद वाच्य के निम्नलिखित तीन भेद हैं:

    1. कर्तृवाच्य
    2. कर्मवाच्य
    3. भाववाच्य




कर्तृवाच्य

जब वाक्य में कही गई क्रिया का प्रधान विषय कर्ता हो अर्थात् क्रिया का लिंग, वचन और पुरुष कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार हो तो उसे कर्तृवाच्य कहते हैं।
जैसे:
क. मंजू पुस्तक पढ़ती है।
ख. मनोज विद्यालय को जाएगा।
ग. लड़के गेंद से खेलेंगे।
घ. मीरा और सुधा कढ़ाई कर रही हैं।

इन वाक्यों की क्रियाओं का प्रधान विषय कर्ता है, अतः ये कर्तृवाच्य के रूप हैं।

कर्मवाच्य

जब वाक्य में क्रिया द्वारा कही गई बात का प्रधान विषय कर्म हो और कर्म के लिंग, वचन व पुरुष के अनुसार ही क्रिया के लिंग, वचन व पुरुष हों तो उसे कर्मवाच्य कहते हैं।
जैसे:
क. यह पुस्तक डा. त्रिपाठी द्वारा लिखी गई है।
ख. पानी मोहन द्वारा पिया गया है।
ग. रमा से पत्र लिखा जाता है।
घ. अनिल से पुस्तक पढ़ी जाती है।
इन वाक्यों की क्रियाओं का प्रधान विषय कर्म- पुस्तक, पत्र तथा दूध हैं, अतः ये कर्मवाच्य की क्रियाएँ हैं।

भाववाच्य

जब वाक्य में क्रिया द्वारा कही गई बात का प्रधान विषय न कर्ता हो, न कर्म हो अपितु भाव अर्थात् क्रिया का अर्थ ही हो, उसे भाववाच्य कहते हैं। इसमें क्रिया अन्य पुरुष, एकवचन और पुल्लिग में प्रयुक्त होती है।
जैसे:
क. आकाश से उठा नहीं जाता।
ख. राहुल से सोया नहीं जाता।
ग. मीना से दौड़ा नहीं जाता।
घ. सुधा से चला नहीं जाता।।
इन वाक्यों की क्रियाओं का प्रधान विषय कर्ता नहीं है, अपितु भाव ही है। अतः ये भाववाच्य के रूप हैं। विशेष- भाववाच्य केवल अकर्मक धातुओं से ही बनता है।




वाच्य-परिवर्तन

एक वाच्य से दूसरे वाच्य में बदलने को वाच्य-परिवर्तन कहते हैं।
वाच्य-परिवर्तन निम्न प्रकार से होता है।
कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य
1. कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में क्रिया को बदलते समय क्रिया का लिंग, वचन और पुरुष कर्म के अनुसार हो जाता है।
2. क्रिया के साथ ‘जा’ धातु का प्रयोग होता है।
3. कर्ता के साथ “से” या “द्वारा” शब्द लगता है।
4. क्रिया के काल में परिवर्तन नहीं होता।

कर्तृवाच्यकर्मवाच्य
अविनाश ने पानी पिया।अविनाश से पानी पिया गया।
लड़के परीक्षा दे रहे हैं।लड़कों से परीक्षा दी जा रही है।
रीमा पत्र लिखती है।रीमा से पत्र लिखा जाता है।
कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य में बनाना
    1. कर्ता में लगे “से” या “के द्वारा’ विभक्ति-चिह्न को हटा दें।
    2. यदि कर्मवाच्य में “जाना” क्रिया का सामान्य भूतकाल रूप हो, तो कर्ता में लगे “से” या “के द्वारा” विभक्ति चिह्न को हटाकर उसके स्थान पर “ने” विभक्ति लगाई जाएगी।
    3. क्रिया के लिंग, वचन कर्ता के अनुसार बदल दिए जाते हैं, परंतु यदि क्रिया सामान्य भूतकाल की है तो लिंग, वचन कर्म के अनुसार ही रहते हैं।



कर्मवाच्यकर्तृवाच्य
दादी द्वारा कहानी सुनाई जाती है।दादी कहानी सुनाती है।
विनोद द्वारा सुंदर कविता लिखी जाती है। विनोद सुंदर कविता लिखता है।

स्मरणीय तथ्य
किसी भी वाक्य में उसकी क्रिया का संबंध कर्ता या कर्म के साथ होता है। कर्ता अथवा कर्म के अनुसार उसमें परिवर्तन भी होता है। इस संबंध को वाच्य कहते हैं। वाच्य तीन प्रकार के होते हैं:

    • कर्तृवाच्य
    • कर्मवाच्य
    • भाववाच्य
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