Class 8 Hindi Grammar Chapter 30 सार लेखन

Class 8 Hindi Grammar Chapter 30 सार लेखन (Saar Lekhan). Summary writing provides good practice of topic. Here we can express the complete matter of passage using terms of grammar.

All the topics are prepared for CBSE and State Board Curriculum based on new academic session 2020-2021. Some samples of topic and their summaries are given here for practice, so that students can take idea about सार लेखन and its terms.

कक्षा 8 हिन्दी व्याकरण पाठ 30 सार लेखन

कक्षा: 8हिन्दी व्याकरण
अध्याय: 30सार लेखन

सार लेखन

किसी अनुच्छेद, भाव, निबंध आदि को थोड़े से शब्दों में लिखना सार लेखन कहलाता है। सार लेखन के लिए निम्नलिखित वाक्यों को ध्यान में रखना चाहिए:

    • 1. पूरे गद्यांश को कम से कम तीन बार पढ़ना चाहिए।
    • 2. दिए गए गद्यांश का ठीक-ठीक अर्थ समझ लेना चाहिए।
    • 3. उसके महत्वपूर्ण अंशों को रेखांकित करना चाहिए।
    • 4. गद्यांश के अनावश्यक विस्तार, सूक्तियों, उद्धरणों आदि को छोड़ देना चाहिए।
    • 5. वह अपनी भाषा में लिखा जाना चाहिए।
    • 6. सार-लेखन मूल गद्यांश का एक-तिहाई होना चाहिए।
    • 7. जहाँ तक हो सके वाक्य सरल व छोटे होने चाहिए।
    • 8. शीर्षक ऐसा चुनना चाहिए जो गद्यांश के सम्पूर्ण भाव को प्रकट करता हो।




निम्नलिखित अवतरणों का सार लगभग एक-तिहाई शब्दों में लिखिए और उसका उपयुक्त शीर्षक भी दीजिए।

अवतरण: 1

चरित्र का जीवन में अत्यंत महत्व है। खासतौर से वर्तमान जीवन में इसका महत्व और भी बढ़ता जा रहा है। अतः हम सभी को चरित्र निर्माण की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। चरित्र निर्माण से तात्पर्य यह है कि हम उन गुणों की बात कर रहे हैं जो इसके अंतर्गत है। उनमें मुख्य विनय, उदारता, धैर्य, स्वावलम्बन, सत्यवादी, लोभहीनता तथा कर्त्तव्य-परायणता इत्यादि मुख्य हैं। यही गुण मिलकर चरित्र का निर्माण करते हैं। छात्रों के चरित्र निर्माण में शिक्षक ही सहायक हो सकते हैं। जीवन के प्रारंभ में शिक्षकों का योगदान छात्रों के चरित्र निर्माण शिक्षा का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।

शीर्षक

चरित्र का महत्व

सार

जीवन को ऊपर उठाने के लिए मनुष्य को अपने चरित्र पर ध्यान देना चाहिए। विनय, उदारता, सत्यवादिता, कर्त्तव्य-परायणता आदि चरित्र के मुख्य गुण हैं। छात्रों के चरित्र निर्माण में शिक्षकों का योगदान महत्वपूर्ण है। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य चरित्र निर्माण ही होना चाहिए।

अवतरण: 2

जन्मभूमि किसे प्यारी नहीं लगती। कहा तो यहाँ तक कहा गया है कि जन्मभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ है। मनुष्य जहाँ जन्म लेता है, वहाँ की धूली में खेलकर बड़ा होता है वहाँ के सभी लोग उसके जाने-पहचाने हो जाते हैं। सभी की भाषा और रहन-सहन समान होने के कारण वहाँ के लोगों से उसकी ममता का होना स्वाभाविक है। मनुष्य चाहे कितने भी अच्छे स्थान पर रहता हो लेकिन उसका मन अपनी जन्म-भूमि की ओर आने को उत्सुक रहता है। जिस देश में हमने जन्म लिया है उसके अन्न, जल और वायु से हमारा पालन हुआ है, उसके प्रति प्रेम की भावना रखना हमारा कर्त्तव्य है। पाकिस्तान ने हमारे देश की भूमि पर अधिकार किया। हमारे वीर जवानों ने जन्मभूमि की रक्षा में कारगिल के युद्ध में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। अपनी भूमि वापस ली और दुश्मन के दाँत खट्टे किए। देश की अवनति में हमारी अवनति होगी, उससे न तो हम संपन्न रह सकते हैं और न हमारा मान हो सकता है। देश के प्रति प्रेम की भावना प्रत्येक देशवासी को रखनी चाहिए।

शीर्षक

देश प्रेम की भावना

सार

प्रत्येक मनुष्य का देश के प्रति प्रेम स्वाभाविक होता है जिसकी गलियों में खेलकर वह बड़ा होता है। रहन-सहन तथा भाषा के कारण उसके सभी प्रिय होते हैं। जन्मभूमि के प्रति प्रेम में मनुष्य दूर से अपनी मिट्टी को चूमने के लिए लालायित रहता है। सैनिक अपनी जान अपनी देश की सीमाओं की रक्षा में न्यौछावर केवल देश प्रेम के लिए करते हैं। देश की तरक्की में हमारी संपन्नता और मान हो सकता है अथवा नहीं। देश प्रेम की भावना हर हृदय में होनी चाहिए।



अवतरण: 3

राष्ट्रीय कार्यों में सुधार की आशा तभी की जा सकती है जब व्यक्तिगत ईमानदारी को हम अपने जीवन में आत्मसात् करते हैं। यह वे बूंदें हैं जो वर्षा कराती हैं। जब मैं अपने लिए पर्याप्त बना लूँगा, तब अच्छा बन जाऊँगा। ऐसा कहना या सोचना बेकार है। यदि कोई आदमी बेईमान है और अपने कार्यों का प्रयोग कर बेहतर बनता है तो राष्ट्रीय चरित्र पुनर्जीवित नहीं हो सकता है। वह निरंतर गिरता जाएगा जिसे हम राष्ट्रीय चरित्र कहते हैं। उसे प्रत्येक व्यक्ति की समग्रता ही निर्मित करती है। कुछ एक लोगों के चरित्रवान होने से ही राष्ट्र ऊँचा नहीं हो जाता।

शीर्षक

राष्ट्रीय चरित्र

सार

यह हमारी गलत धारणा होगी कि अपने हितों को प्राथमिकता देकर ही राष्ट्रीय चरित्र गिरेगा। राष्ट्रीय चरित्र प्रत्येक व्यक्ति के चरित्र की समग्रता का नाम है। राष्ट्र सबके चरित्रवान होने से ऊँचा होगा।

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