Class 6 Hindi Grammar Chapter 12 काल

Class 6 Hindi Grammar Chapter 12 काल (Kaal). We will discuss here about भूतकाल, वर्तमान काल and भविष्यत् काल with suitable examples.

Examples are simple and easy to learn for a 6th standard student. Chapter 12 of Class 6 Hindi Vyakaran explain about Kaal (Tenses) and its kinds. We have updated all the contents according to latest CBSE Syllabus and current NCERT Books for session 2020-2021.

कक्षा 6 हिन्दी व्याकरण पाठ 12 काल – वर्तमान, भूत, भविष्य

कक्षा: 6हिन्दी व्याकरण
अध्याय: 12काल -वर्तमानकाल, भूतकाल और भविष्यकाल

काल किसे कहते हैं?

काल

क्रिया के जिस रूप से कार्य संपन्न होने का समय ज्ञात हो काल कहलाता है।
1. रोहित खाना खा रहा है।
2. रोहित खाना खा रहा था।
3. रोहित कल शिमला जाएगा।
इन वाक्यों में “रहा है”, “रहा था” और “जाएगा” क्रिया शब्दों से क्रिया के अलग-अलग समय में होने का पता चलता है। अतः ये तीनों शब्द काल (समय) के सूचक हैं।

उपर्युक्त तीनों वाक्यों में पहले वाक्य से पता चलता है कि खाने की क्रिया अभी हो रही है। दूसरे वाक्य में खाने की क्रिया कुछ समय पहले हो रही थी तथा तीसरे वाक्य में जाने की क्रिया अभी नहीं हुई बल्कि दूसरे दिन होगी।
इस आधार पर काल के तीन भेद हैं:

    1. भूतकाल,
    2. वर्तमान काल,
    3. भविष्यत् काल




भूतकाल

क्रिया के जिस रूप से कार्य के बीते हुए समय में होने या किए जाने का बोध हो, उसे भूतकाल कहते हैं।
जैसे:
1. अमित ने खाना खाया।
2. हनुमान ने लंका जलाई।
3. वह खाना खा रहा था।

इन वाक्यों से स्पष्ट है कि भूतकाल में प्रयुक्त क्रिया की पूर्णता या संपन्नता के समय में भी अंतर होता है। इसी आधार पर भूतकाल के छह भेद माने जाते हैं:

    • (क) सामान्य भूत,
    • (ख) पूर्ण भूत,
    • (ग) अपूर्ण भूत,
    • (घ) आसन्न भूत,
    • (ङ) संदिग्ध भूत,
    • (च) हेतुहेतुमद् भूत
सामान्य भूतकाल

क्रिया के जिस रूप से भूतकाल के किसी विशेष समय का निश्चय नहीं होता, अर्थात् उसका सामान्यतः बीते समय में होने या करने का ही बोध होता है, उसे सामान्य भूतकाल कहते हैं।
जैसे:
1. सूरज विद्यालय गया।
2. सोनम ने पत्र लिखा।
3. मैंने फल खाया।

इन क्रियाओं से यह पता नहीं चलता कि क्रिया समाप्त हुए थोड़ी देर हुई है या अधिक।

    • पूर्ण भूत
      क्रिया के जिस रूप से उसके कार्य के बहुत समय पहले होने का पता चले, उसे पूर्ण भूत कहते हैं ।
      जैसे:
      1. वर्षा होने से पहले फसल सूख चुकी थी।
      2. मोहित खाना खा चुका था।
      इन क्रियाओं के अंत में था”, “थी”, का प्रयोग किया जाता है।
    • अपूर्ण भूत
      क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि क्रिया बहुत समय पहले हो रही थी, पर उसकी समाप्ति का पता न चले, उसे अपूर्ण भूत कहते हैं।
      जैसे:
      1. अमन नाच रहा था।
      2. रिया लिख रही थी।
    • आसन्न भूत
      क्रिया के जिस रूप से क्रिया के व्यापार का अभी-अभी समाप्त होना ज्ञात हो, उसे आसन्न भूत कहते हैं।
      जैसे:
      1. रीना अभी-अभी विद्यालय गई है।
      2. आयूष बाजार से आया है।




संदिग्ध भूत

क्रिया के जिस रूप से भूतकाल में क्रिया के होने का संदेह हो, उसे संदिग्ध भूत कहते हैं।
जैसे:
1. वह चला गया होगा।
2. वह दिल्ली से लौट आया होगा।
क्रिया के इस रूप में सामान्य भूत में प्रयुक्त क्रिया के साथ “होगा”, “होगी” का प्रयोग होता है। इन शब्दों का प्रयोग कार्य की संदिग्धता को दर्शाता है।

हेतुहेतुमद् भूत
क्रिया के जिस रूप से यह पता लगे कि कार्य भूतकाल में हो सकता था, पर किसी कारण से न हो सका अर्थात् एक क्रिया दूसरी पर निर्भर हो, उसे हेतुहेतुमद् भूतकाल कहते हैं।
जैसे:
1. यदि मेहनत करते तो अवश्य पास होते।
2. वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।
इन वाक्यों में पहली क्रियाएँ कारण (हेतु) हैं और दूसरी क्रियाएँ कार्य (हेतुमद्) हैं।

वर्तमान काल

क्रिया के जिस रूप से कार्य के वर्तमान समय में होने का बोध हो, उसे वर्तमानकाल कहते हैं।
जैसे:
1. विराट खेल रहा है।
2. प्रिती खाना खा रही है।
3. सूर्य उदय हो रहा है।
इन वाक्यों में “रही है” और “रहा है” क्रिया शब्द से वर्तमान समय का बोध होता है अतः यह वर्तमान काल की क्रिया है।

वर्तमान काल के तीन भेद हैं”

    • (क) सामान्य वर्तमान
    • (ख) अपूर्ण वर्तमान
    • (ग) संदिग्ध वर्तमान



सामान्य वर्तमान

क्रिया के जिस रूप से क्रिया का वर्तमान में सामान्यतया होना पाया जाए, उसे सामान्य वर्तमान कहते हैं।
जैसे:
1. शेर दहाड़ता है।
2. प्रिया गाती है।
छात्र पढ़ते हैं। क्रिया के इस काल में धातु के आगे “ता है”, “ते हैं”, लगता है।

अपूर्ण वर्तमान
क्रिया के जिस रूप से पता चले कि वर्तमान कार्य अभी जारी है, उसे अपूर्ण वर्तमान कहते हैं।
जैसे:
1. शेर दहाड़ रहा है।
2. बादल गरज रहे हैं।
क्रिया के इस रूप में धातु के साथ “रहा है”, “रही है”, “रहे हैं” का प्रयोग किया जाता है।

संदिग्ध वर्तमान
क्रिया के जिस रूप से उसके वर्तमान में होने का पता तो चले, पर होने में संदेह पाया जाए, उसे संदिग्ध वर्तमान कहते हैं।
जैसे:
1. नृत्यांगनाएँ नाच रही होंगी।
2. वर्षा हो रही होगी।
इन उदाहरणों में प्रयुक्त क्रियाओं के होने की संभावना वर्तमान काल में ही है। क्रिया के इस रूप में धातु के साथ “होगा”, “होगी”, “होंगे”, “होंगी” का प्रयोग किया जाता है।

भविष्यत् काल

क्रिया के जिस रूप से कार्य के आने वाले समय में होने का बोध हो उसे भविष्यत् काल कहते हैं।
जैसे:
1. मैं कल मेरठ जाऊँगा।
2. रोशनी गीत गाएगी।
इन वाक्यों में “जाऊँगा”, “गाएगी” क्रिया शब्दों से आने वाले समय (भविष्य) का बोध होता है, अतः ये भविष्यत् काल की क्रियाएँ हैं।

भविष्यत् काल के दो भेद होते हैं:
(क) सामान्य भविष्यत्,
(ख) संभाव्य भविष्यत्



    • सामान्य भविष्यत्
      क्रिया के जिस रूप को सामान्यतया कार्य के भविष्यत् में होने की सूचना मिले, उसे सामान्य भविष्यत् कहते हैं। जैसे:
      1. प्रेरणा पत्र लिखेगी।
      2. अक्षय नोएडा जाएगा।
    • संभाव्य भविष्यत्
      क्रिया के जिस रूप से भविष्य में होने वाले कार्य की संभावना का बोध हो, उसे संभाव्य भविष्यत् कहते हैं। जैसे:
      1. शायद आज राम आ जाए।
      2. शायद मुझे देर हो जाए।
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