Class 7 Hindi Grammar Chapter 13 विशेषण

Class 7 Hindi Grammar Chapter 13 विशेषण (Visheshan). Here, students can practice Visheshan and Types of Visheshan which are updated for new academic session 2020-2021.

Class 7 Hindi Vyakaran is following the CBSE Syllabus and State board curriculum for academic session 2020-21. Examples and proper definitions of each term is given in simplified manner, so that students can understand easily.

कक्षा 7 हिन्दी व्याकरण पाठ 13 विशेषण

कक्षा: 7हिन्दी व्याकरण
अध्याय: 13विशेषण

विशेषण

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताए, उसे विशेषण कहते हैं।
निम्नलिखित वाक्यों पर ध्यान दीजिए:

    1. मयंक अच्छा लड़का है।
    2. मेरे पास पचास रुपये हैं।
    3. उसके पास कुछ सेब हैं।
    4. रिया सुंदर है।

उपर्युक्त वाक्यों में प्रयुक्त शब्द अच्छा, पचास, कुछ, सुंदर शब्द वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बता रहे हैं।




विशेष्य

विशेषण पद जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है, उसे “विशेष्य” कहते हैं। नीचे दिए गए इस संबंध को और स्पष्ट रूप में समझिए:
विशेषण विशेष्य:
1. लंबी गाय
2. तीन केले
3. दो किलो चीनी

विशेषण के भेद

विशेषण के चार मुख्य भेद हैं:

    • 1. संख्यावाचक विशेषण
    • 2. परिमाणवाचक विशेषण
    • 3. गुणवाचक विशेषण
    • 4. सार्वनामिक विशेषण

संख्यावाचक विशेषण

जिस विशेषण से संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का ज्ञान हो, उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे: तीन, दस, कुछ, अनेक आदि।

संख्यावाचक विशेषण के भेद

संख्यावाचक विशेषण दो प्रकार के होते हैं:
1. निश्चित संख्यावाचक
2. अनिश्चित संख्यावाचक

निश्चित संख्यावाचक

जिस विशेषण से किसी निश्चित संख्या का बोध हो, उसे निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे: दो, दस, चार आदि।

अनिश्चित संख्यावाचक

जिस विशेषण से किसी निश्चित संख्या का बोध न हो, उसे अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे: अनेक, कुछ, थोड़ा आदि।




परिमाणवाचक विशेषण

जिस विशेषण से किसी वस्तु की तौल, नाप या माप का ज्ञान हो, उसे परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे: कुछ दूध, सवा आठ, पाँच गज आदि।

परिमाणवाचक विशेषण के भेद

परिणामवाचक विशेषण दो प्रकार के होते हैं:
क. निश्चित परिमाणवाचक
ख. अनिश्चित परिमाणवाचक

निश्चित परिमाणवाचक

जिस विशेषण से किसी निश्चित परिमाण का ज्ञान हो, उसे निश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे: पाँच हाथ जमीन, दो किलो चीनी आदि।

अनिश्चित परिमाणवाचक

जिस विशेषण से किसी निश्चित परिमाण का ज्ञान न हो, उसे अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे: थोड़े चावल, कुछ दूध आदि।

गुणवाचक विशेषण

जिस विशेषण से संज्ञा या सर्वनाम के गुण अर्थात् रूप, रंग, स्वभाव आदि का ज्ञान हो, उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे: अच्छा, पीला, दयालु, मीठा आदि।

सार्वनामिक विशेषण

जिस सर्वनाम का प्रयोग विशेषण के रूप में होता है, उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। जैसे:

    • क. यह सूरत देखो।
    • ख. वह अच्छा गाती है।
    • ग. वह लड़की अच्छा गाती है।
    • घ. तुम क्या करोगे?
सर्वनामविशेषण
यह ले लो।यह सूरत देखो।
वह अच्छा गाती है।वह लड़की अच्छा गाती है।
तुम क्या करोगे?तुम लोग क्या करोगे?

प्रविशेषण- विशेषण

अथवा क्रिया-विशेषण की विशेषता बताने वाले शब्दों को प्रविशेषण कहते हैं। जैसे: वह बड़ा साहसी है। यहाँ “बड़ा” प्रविशेषण है क्योंकि वह “वह” का विशेषण “साहसी” की विशेषता बता रहा है। इसी प्रकार
क. दिल्ली बहुत प्रदूषित शहर है।
ख. तुम अत्यंत मेधावी छात्रा हो।

विशेषणों की तुलना

जिन विशेषणों द्वारा दो या अधिक वस्तुओं या व्यक्तियों की तुलना की जाती है, उन्हें तुलनात्मक विशेषण कहते हैं। ऐसे विशेषणों की तीन अवस्थाएँ होती हैं: मूल अवस्था, उत्तर अवस्था और उत्तम अवस्था।

मूल अवस्था

इस अवस्था में किसी प्रकार की तुलना नहीं होती है। जैसे: राम श्रेष्ठ है।

उत्तर अवस्था

इस अवस्था में दो वस्तुओं, व्यक्तियों या स्थानों की तुलना की जाती है। जैसे: राम श्रेष्ठतर है। आम अंगूर से मीठा है।

उत्तम अवस्था

इस अवस्था में दो या दो से अधिक व्यक्तियों, या स्थानों में सबसे बढ़कर बताता है। जैसे: राम अपने भाइयों में श्रेष्ठतम् है। आम सभी फलों से मीठा है। केवल गुणवाचक, अनिश्चित संख्यावाचक और अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषणों की ही तुलनात्मक अवस्थाएँ होती हैं।

गुणवाचक विशेषणों द्वारा संज्ञा और सर्वनाम शब्दों के निम्नलिखित विशेषताओं का बोध होता है।

    1. दशा: कमजोर, हल्का, गीला, भीगा, पालतू, अस्वस्थ आदि।
    2. रंग: सफेद, लाल, पीला, नीला, धुंधला, गुलाबी आदि।
    3. स्वाद: मीठा, कड़वा, तीखा, फीका, तीखा, नमकीन आदि।
    4. गुण: मूर्ख, बुरा, तुच्छ, अच्छा, कायर, झूठा आदि।
    5. स्पर्श: सख्त, खुरदरा, कठोर, स्निग्ध, मुलायम, मृदुल आदि।
    6. आकार: सीधा, चपटा, लंबा, चौड़ा, छोटा, तिरछा आदि।
    7. समय: भूत, वर्तमान, अगला, पिछला, दोपहर, नया आदि।
    8. स्थान: ऊँचा, नीचा, भीतर, बाहरी, विदेश, पंजाब आदि।




विशेषण की तुलनात्मक अवस्थाएँ

मूलावस्थाउत्तरावस्थाउत्तम अवस्था
प्रियप्रियतरप्रियतम
कोमलकोमलतरकोमलतम
श्रेष्ठश्रेष्ठतरश्रेष्ठतम
न्यूनन्यूनतरन्यूनतम
गुरुगुरुतरगुरुतम
योग्ययोग्यतरयोग्यतम

विशेषण की रचना

1. कुछ शब्द अपने मूल रूप में ही विशेषण होते हैं।

जैसे: बड़ा, छोटा, गोरा, काला, मोटा, दुबला, हरा, चतुर, तीव्र आदि।

2. कुछ विशेषणों की रचना संज्ञाओं में प्रत्यय लगाकर की जाती है।
संज्ञाप्रत्ययविशेषण
अंतइमअतिम
जटाइलजटिल
रंगईनरंगीन
कल्पनाइककाल्पनिक
वाचआळवाचाल
3. कुछ विशेषण क्रियाओं में प्रत्यय लगाकर बनाए जाते हैं।
क्रियाप्रत्ययविशेषण
पढ़नापठित
पूजनाअनीयपूजनीय
लुटनालुटा
तैरनाअकतैराक
चालचालू
दिखानावटीदिखावटी
4. कुछ विशेषणों की रचना सर्वनामों से होती है
सर्वनामविशेषण
तुमतुम्हारा
जोजैसा
वहवैसा
यहऐसा
कौनकैसा
आपअपना
5. कुछ विशेषणों की रचना अव्यय से भी होती है
अव्ययविशेषण
आगेअगला
पीछेपिछला
भीतरभीतरी
नीचेनिचला
ऊपरऊपरी
बाहरबाहरी
6. कुछ विशेषणों का निर्माण उपसर्ग जोड़कर भी होता है
उपसर्गविशेषण
अटल, अबोध
सुसुगम, सुपथ
दुदुमंजिला, दुगुना
सगुण, सजल
निनिडर, निगम



स्मरणीय तथ्य

संज्ञा सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं। विशेषण जिस शब्द की विशेषता बताता है, उसे विशेष्य कहते हैं। विशेषण के निम्नलिखित भेद हैं:
1. गुणवाचक विशेषण
2. परिमाणवाचक विशेषण
3. संख्यावाचक विशेषण
4. सार्वनामिक विशेषण
विशेषण की विशेषता बताने वाले शब्द प्रविशेषण कहलाते हैं। इन अवस्थाओं का प्रयोग तुलना के लिए होता है।
परिमाणवाचक विशेषण के दो भेद है:
1. निश्चित परिमाणवाचक
2. अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण
विशेषणों की तीन अवस्थाएँ होती हैं:
1. मूलावस्था
2. उत्तमावस्था
3. उत्तरावस्था या पूर्वावस्था, मध्यवस्था, अंत्यावस्था

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