Class 7 Hindi Grammar Chapter 7 लिंग

Class 7 Hindi Grammar Chapter 7 लिंग (Ling). We have updated Class 7 Hindi Vyakaran for academic session 2021-2022 State board as well as CBSE Board students free to use.

UP Board, MP Board and all other state boards can use these Vyakaran contents free of cost to improve their Hindi Vyakaran. Learn here more examples about Striling and Pulling, conversion of Striiling to Pulling or Pulling to Striiling.




कक्षा 7 हिन्दी व्याकरण पाठ 7 लिंग

कक्षा: 7 हिन्दी व्याकरण
अध्याय: 7 लिंग तथा उसके भेद

लिंग तथा लिंग के भेद

शब्द के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि जिसके विषय में बात हो रही है, वह पुरुष जाति का है अथवा स्त्री जाति का, उसे लिंग कहते हैं। हिंदी में लिंग दो प्रकार के होते हैं:

    • 1. पुल्लिंग
    • 2. स्त्रीलिंग




    • पुल्लिंग: पुरुष जाति का बोध कराने वाले शब्द पुल्लिंग कहलाते हैं। जैसे- कमरा, लड़का, विद्यालय आदि।
    • स्त्रीलिंग: स्त्री जाति का बोध कराने वाले शब्द को स्त्रीलिंग कहलाते हैं। जैसे- लड़की, माता, गाय, बिल्ली आदि।

लिंग का व्यवहारिक प्रयोग

अप्राणीवाचक संज्ञाओं का प्रयोग व्यवहार तथा परंपरा के आधार पर सुविधानुसार पुल्लिंग व स्त्रीलिंग में ही करना पड़ता है। हिंदी में लिंग-भेद सदा प्राकृतिक नहीं होता, जैसे: कौवा, मछली, तोता, मक्खी आदि ऐसे शब्द है, जिनसे नर और मादा दोनों का ही बोध होता है। लेकिन हिंदी में कौवा तथा तोता पुल्लिंग हैं, तो मछली तथा मक्खी स्त्रीलिंग।

लिंग-ज्ञान

    1. प्राणीवाचक संज्ञाएँ यदि पुरुष का ज्ञान कराएँ तो पुल्लिंग और स्त्री का ज्ञान कराएँ तो स्त्रीलिंग होती हैं। जैसे: पुल्लिंग – पिता, लड़का, अध्यापक; स्त्रीलिंग, माता, लड़की, अध्यापिका।
    2. कुछ प्राणीवाचक संज्ञाएँ जो प्रायः पशु-पक्षी या कीट आदि हैं, पुरुष व स्त्री दोनों का ज्ञान कराने पर भी नित्य पुल्लिंग या नित्य स्त्रीलिंग होती हैं। नित्य पुल्लिंग -चीता, भेड़िया, कौआ, खरगोश, खटमल, उल्लू, पशु, तोता, पक्षी, बिच्छू, मच्छर, बाज, गरुड़, गैंडा, कीड़ा आदि। नित्य स्त्रीलिंग-कोयल, चील, लोमड़ी, गिलहरी, दीमक, तितली, मकड़ी, मैना, मछली, मक्खी, छिपकली, संतान आदि।
    3. प्राणियों के समूह का बोध कराने वाली संज्ञाएँ व्यवहार के अनुसार कुछ पुल्लिंग हैं। पुल्लिंग- दल, समूह, समाज, परिवार, झुंड तथा कुंटुंब आदि। स्त्रीलिंग- भीड़, सेना, टोली, सरकार, सभा, कमेटी, संसद आदि।
    4. कुछ प्राणीवाचक शब्दों का प्रयोग केवल स्त्रीलिंग में ही होता है। जैसेः संतान, नर्स, सवारी, सती, सुहागन आदि।
    5. कुछ पद-बोधक शब्द उभयलिंगी होते हैं, अर्थात् पुरुष के लिए प्रयोग किए जाने पर पुल्लिग तथा स्त्री के लिए प्रयोग किए जाने पर स्त्रीलिंग माने जाते हैं। जैसे: राजदूत, गवर्नर, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति आदि।
    • 6. एक ही वस्तु के पर्यायवाची अलग-अलग लिंगों के हो सकते हैं। जैसे:
पुल्लिंग स्त्रीलिंग
नेत्र आँख
चित्र तसवीर
पत्र चिट्ठी
ग्रंथ पुस्तक

पुल्लिंग की पहचान

    • (क) प्राय: भारी, मोटी, भद्दी और विशाल वस्तुओं के नाम पुल्लिंग होते हैं। जैसे: पत्थर, रस्सा, टीला, गट्ठर आदि।
    • (ख) देशों के नाम पुल्लिंग होते हैं। जैसे: भारत, जापान, फ्रांस, अमेरिका आदि। (अपवाद-श्रीलंका)।
    • (ग) पर्वतों के नाम पुल्लिंग होते हैं। जैसे: हिमालय, कैलाश, विंध्याचल आदि।
    • (घ) ग्रहों के नाम: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, शनि, राहू आदि। (अपवाद-पृथ्वी)
    • (ङ) अनाजों के नाम: गेहूँ, चना, बाजरा, चावल, तिल आदि (अपवाद-ज्वार, मटर, मक्का )
    • (च) वृक्षों के नाम: आम, पीपल, बरगद आदि (अपवाद-इमली)
    • (छ) फलों के नाम: आम, संतरा, केला, नींबू, अमरूद आदि (अपवाद-लीची)
    • (ज) द्रव्य-पदार्थों के नाम: घी, तेल, दही, पानी, शर्बत, मक्खन आदि (अपवाद-चाय, काफी, छाछ, लस्सी)।
    • (झ) धातुओं के नाम: सोना, लोहा, हीरा, ताँबा, पन्ना आदि (अपवाद-पीतल, चाँदी, मणि)।
    • (ज) दिनों के नाम: सोमवार, मंगलवार, बुधवार आदि।




स्त्रीलिंग की पहचान

    • (क) घी, दही, मोती, पानी को छोड़कर अन्य इ, ईकारांत अप्राणीवाचक संज्ञाएँ स्त्रीलिंग होती हैं।
    • (ख) नदियों के नाम – गंगा, यमुना, कावेरी, रावी, कृष्णा, झेलम।
    • (ग) नक्षत्रों के नाम – रोहिणी, चित्रा, अश्विनी आदि।
    • (घ) तिथियों के नाम – प्रतिपदा, पूर्णिमा, पंचमी, अमावस्या आदि।
    • (ङ) भाषाओं के नाम – हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, पंजाबी आदि।
    • (च) लिपियों के नाम – देवनागरी, उर्दू, रोमन, गुरुमुखी।
    • (छ) संस्कृत के आकारांत शब्द, जैसे- छात्रा, सुता, दया, प्रिया, लता, कृपा, शोभा, घृणा, माला आदि।

पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने संबंधी नियम

यहाँ पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने संबंधी कुछ नियम दिए जा रहे हैं। इनके विषय में दो बातें समझ लेनी चाहिए। कुछ पुल्लिग शब्द “स्त्री प्रत्यय” जोड़ने से स्त्रीलिंग बनते हैं, तो कुछ स्त्रीलिंग शब्द पुल्लिग शब्दों से सर्वथा भिन्न होते हैं। अप्राणीवाचक शब्दों में पुरुष या स्त्री नहीं होती वहाँ तो स्त्रीलिंग लघुता का सूचक है। जैसे: “डिबिया” का अर्थ छोटा डिब्बा है।

प्रत्यय जोड़कर बनने वाले शब्द
(क) “अ” का “आ” करके
पुल्लिंग स्त्रीलिंग
मूर्ख मूर्खा
आचार्य आचार्या
छात्र छात्रा
प्रिय प्रिया
वृद्ध वृद्धा
अनुज अनुजा
(ख) “आ” को “ई” करके
पुल्लिंग स्त्रीलिंग
दादा दादी
लड़का लड़की
बकरा बकरी
नाना नानी
चाचा चाची
मौसा मौसी
(ग) “आ” को “इया” करके
पुल्लिंग स्त्रीलिंग
कुत्ता कुतिया
चूहा चुहिया
बंदर बंदरिया
बेटा बिटिया
गुड्डा गुड्डीया




(घ) व्यवसायसूचक शब्दों के अंत में “इन” जोड़कर
पुल्लिंग स्त्रीलिंग
माली मालिन
पुजारी पुजारिन
ग्वाला ग्वालिन
नाई नाईन
मालिक मालकिन
(ङ) कुछ जाति तथा उपनामसूचक शब्दों के अंत में “आइन” लगाकर स्त्रीलिंग
पुल्लिंग स्त्रीलिंग
ठाकुर ठकुराइन
पंडा पंडाइन
पंडित पंडिताइन
लाला ललाइन
बाबू बाबूइन
(च) शब्द के अंत में “नी” जोड़कर
पुल्लिंग स्त्रीलिंग
जाट जाटनी
मोर मोरनी
रीछ रीछनी
सिंह सिंहनी
चोर चोरनी
(छ) शब्द के अंत में “आनी” जोड़कर
पुल्लिंग स्त्रीलिंग
सेठ सेठानी
इंद्र इंद्राणी
नौकर नौकरानी
देवर देवरानी
क्षत्रिय क्षत्रियाणी
(ज) “वान’ को “वती” तथा “मान्” को “मती” करके
पुल्लिंग स्त्रीलिंग
श्रीमान श्रीमती
बलवान बलवती
पुत्रवान पुत्रवती
बुद्धिमान बुद्धिमती

(झ) “अक” को “इका” बनाकर
पुल्लिंग स्त्रीलिंग
लेखक लेखिका
गायक गायिका
दर्शक दर्शिका
याचक याचिका
Class 7 Hindi Grammar Chapter 7 लिंग
लिंग के भेद
स्त्रीलिंग पुललिग
Class 7 Hindi Grammar Chapter 7
Class 7 Hindi Vyakaran Chapter 7 लिंग