Class 7 Hindi Grammar Chapter 25 समास

Class 7 Hindi Grammar Chapter 25 समास (Samaas). Learn here about Samaas and Samaas ke Bhed with Samaas Vichchhed updated for academic session 2020-2021. These contents of Class 7 Hindi Vyakaran are useful not only for CBSE board but for the State boards also.

Practice here, examples and explanations of each topic related to Sammas in standard seven Hindi Vyakaran to score well in school exams.

कक्षा 7 हिन्दी व्याकरण पाठ 25 समास विग्रह

कक्षा: 7हिन्दी व्याकरण
अध्याय: 25समास और समास विग्रह

समास किसे कहते हैं?

दो या दो से अधिक पदों का अपने विभक्ति-चिह्नों को छोड़कर एक हो जाना समास कहलाता है।
निम्नलिखित वाक्यों पर ध्यान दें:

वर्ग कवर्ग ख
घोड़े पर सवारघुड़सवार
गंगा का जलगंगाजल
दस है आनन जिसकेदशानन




उपर्युक्त वाक्यों से स्पष्ट होता है कि यहाँ दो या दो से अधिक पद बिना कारक-चिह्नों के ही आपस में जुड़ गए हैं। समस्त-पद समास रचना में दो या दो से अधिक पद होते हैं। पहले पद को “पूर्व पद” कहते हैं और दूसरे पद को “उत्तर पद” कहते हैं। इन दोनों पदों के मेल से एक नया शब्द बनता है जिसे “समस्त पद” कहते हैं।

समास-विग्रह

जब समस्त-पद के सभी पद अलग किए जाते हैं विग्रह कहलाता है।
जैसे: “माता-पिता”, समस्त पद का विग्रह है, माता और पिता।

संधि और समास में अंतर

कुछ लोग संधि और समास को एक ही मान लेते हैं, लेकिन यह गलत है। संधि और समास में निम्नलिखित अंतर हैं:

    • 1. संधि का अर्थ है- मेल, जबकि समास का अर्थ है- संक्षेप।
    • 2. संधि में वर्गों का मेल होता है जबकि समास में शब्दों (पदों) का।
    • 3. संधि में वर्ण-परिवर्तन होता है जबकि समास में ऐसा नहीं होता है।
    • 4. संधि का विच्छेद किया जाता है, जबकि समास का विग्रह होता है।
    • 5. समास में शब्दों के बीच के विभक्ति चिह्नों का लोप हो जाता है।

समास के भेद

    • 1. अव्ययीभाव समास
    • 2. तत्पुरुष समास
    • 3. कर्मधारय समास
    • 4. द्विगु समास
    • 5. बहुव्रीहि समास
    • 6. वंद्व समास
अव्ययीभाव समास

जिस समस्त पद का पहला पद अव्यय हो और जो क्रियाविशेषण के रूप में प्रयुक्त हो, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।
जैसे: यथाशक्ति, प्रतिदिन, आजन्म आदि। अव्ययीभाव समास से बने शब्द अव्यय होते हैं।




अव्ययीभाव समाससमास विग्रह
यथाशक्तिशक्ति के अनुसार
प्रतिदिनप्रत्येक दिन
आजन्मजन्म से लेकर
रातोंरातरात ही रात में
निर्भयबिना भय के
आजीवनजीवनभर
तत्पुरुष समास

जिस समस्तपद में अंतिम पद की प्रधानता हो, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे: देवपुत्र। देवता का पुत्र। यहाँ अंतिम पद प्रधान है। तत्पुरुष समास में समस्त पदों के लिंग और वचन अंतिम पद के अनुसार ही होते हैं।

तत्पुरुष समास के भेद

कारकों की विभक्तियों के आधार पर तत्पुरुष समास के छह भेद किए गए हैं।

(क) कर्म तत्पुरुष (को-विभक्ति का लोप)
समस्तपदविग्रह
ग्रामगतग्राम को गत
गुरुनमनगुरु को नमन
परलोकगमनपरलोक को गमन
यशप्राप्तयश को प्राप्त
ख. करण तत्पुरुष (से, के द्वारा विभक्ति का लोप)
समस्तपदविग्रह
मनचाहामन से चाहा
कामचोरकाम से चोर
मुँहबोलामुँह से बोला
ईश्वर-प्रदत्तईश्वर द्वारा प्रदत्त
रोगमुक्तरोग से मुक्त




ग. संप्रदान तत्पुरुष (को, के लिए विभक्ति का लोप)
समस्तपद विग्रह
देशप्रेमदेश के लिए प्रेम
पूजाघरपूजा के लिए घर
यज्ञशालायज्ञ के लिए शाला
राहखर्चराह के लिए खर्च
गौशालागौ के लिए शाला
दानपेटीदान के लिए पेटी
घ. अपादान तत्पुरुष (से, विभक्ति का लोप)
समस्तपदविग्रह
प्रदूषण रहितप्रदूषण से रहित
धनहीनधन से हीन
जीवनमुक्तजीवन से मुक्त
धर्मभ्रष्टधर्म से भ्रष्ट
भयभीतभय से भीत
जलविहीनजल से विहीन
ङ. संबंध तत्पुरुष (का, के, की विभक्ति का लोप)
समस्तपदविग्रह
सुरसरितासुर की सरिता
प्रेमसागरप्रेम का सागर
घोड़ा गाड़ीघोड़े की गाड़ी
अमृतधाराअमृत की धारा
लोकसभालोक की सभा
वायुयानवायु का यान
च. अधिकरण तत्पुरुष (में, पर-विभक्ति का लोप)
समस्तपदविग्रह
जलमग्नजल में मग्न
लोकप्रियलोक में प्रिय
कमरदर्दकमर में दर्द
कुलोत्तमकुल में उत्तम
ग्रामवासग्राम में वास
ज्ञानवीरज्ञान में वीर
तत्पुरुष समास के उपभेद

तत्पुरुष समास के दो प्रमुख उपभेद हैं: कर्मधारय समास तथा द्विगु समास

कर्मधारय समास

कर्मधारय समास वहाँ होता है जहाँ दूसरा पद प्रधान हो तथा दोनों पदों में विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान का संबंध हो। जैसे:



उपमानउपमेय
महाराजामहान है जो राजा
सद्धर्मसत् है जो धर्म
नीलगायनील है जो गाय
दुरात्माबुरी है जो आत्मा
मुखचंद्रमुख रूपी चंद्र
4. द्विगु समास

द्विगु समास वहाँ होता है जहाँ समस्त पद का पहला पद संख्यावाचक विशेषण हो। जैसे:

पहला पददूसरा पद
नवरत्न नौरत्नों का समूह
सतसईसात सौ का समूह
चौराहाचार राहों का समूह
चौमासाचार मासों का समूह
त्रिभुवनतीन भुवनों का समूह
सप्तसात दिनों का समूह
5. बहुव्रीहि समास

बहुव्रीहि समास में कोई पद प्रधान नहीं होता है। इनके पद मिलकर कोई अन्य पद की प्रधानता को दर्शाते हैं। जैसे:

प्रथम पदद्वितीय पदअन्य पद
दशमुखदश हैं मुख जिसकेरावण
लंबोदरलंबा उदर है जिसकागणेश
चतुर्भुजचार भुजाएँ हैं जिसकीविष्णु
चतुराननचार मुख हैं जिसकेब्रहमा
नीलकंठनीला कंठ है जिसकामहेश
गजाननगज का मुँह है जिसकागणेश
6. द्वंद-समास

जिस समस्त पद के दोनों पद प्रधान हों वहाँ द्वंद्व समास होता है। जैसे:

प्रथम पदद्वितीय पद
माता-पितामाता और पिता
नाना-नानीनाना और नानी
सीता-रामसीता और राम
गुरु-शिष्यगुरु और शिष्य
जीवन-मरणजीवन और मरण
राजा-रानीराजा और रानी

बहुव्रीहि तथा कर्मधारय समास में अंतर

समस्तपद का एक पद दूसरे पद का विशेषण हो या दोनों में उपमेय- उपमान संबंध हो, तो कर्मधारय समास होता है। लेकिन, यदि दोनों पदों के मेल से कोई अन्य अर्थ प्रकट हो, तो बहुव्रीहि समास होता है। जैसे:

पदकर्मधारय समासबहुव्रीहि समास
नीलकंठनील है जो कंठनीला कंठ है जिसका
सुनयनसुंदर है जो नयनसुंदर है नयन जिसके (विशेष स्त्री)

द्विगु और बहुव्रीहि समास में अंतर

यदि समस्तपद का पहला पद संख्यावाची हो तो द्विगु समास होता है, परंतु यदि दोनों पदों के मेल से कोई अन्य अर्थ प्रकट हो, तो बहुब्रीहि समास होता है। जैसे:



पदद्विगु समासबहुव्रीहि समास
चतुराननचार आननचार हैं आनन जिनके
तिरंगातीन रंगों का समूहतीन हैं रंग जिसमें (भारत का राष्ट्रीय ध्वज)

स्मरणीय तथ्य

    • दो या दो से अधिक पदों का अपने विभक्ति-चिह्नों को छोड़कर एक हो जाना समास कहलाता है।
    • समस्त-पद के सभी पदों को अलग-अलग किए जाने की प्रक्रिया समास-विग्रह कहलाती है।
    • समास के छह भेद होते हैं:
      अव्ययीभाव समास, तत्पुरुष समास, कर्मधारय समास, द्विगु समास, द्वंद्व समास, बहुव्रीहि समास।
    • अव्ययीभाव समास का पूर्वपद अव्यय होता है।
    • तत्पुरुष समास में उत्तरपद प्रधान होता है तथा समास करने पर विभक्तियों का लोप हो जाता है।
    • कर्मधारय समास में पूर्व एवं उत्तरपद विशेषण-विशेष्य तथा उपमान-उपमेय होते हैं।
Class 7 Hindi Grammar Chapter 25 Samaas aur Samaas Vigrah
NCERT Solutions for Class 7 Hindi Grammar Chapter 25 Samaas
CBSE Class 7 Hindi Grammar Chapter 25 Samaas aur Samaas Vigrah
Class 7 Hindi Grammar Chapter 25 Samaas ke udaharan