Class 7 Hindi Grammar Chapter 35 पत्र लेखन

Class 7 Hindi Grammar Chapter 35 पत्र लेखन (Patr Lekhan). Learn here how to write a proper letter for business, formal or informal. Some sample letters are given here to practice for CBSE Exams 2020-2021.

These contents are useful not only for CBSE board but UP, MP and other state boards also. Practice here to know the tips to write a letter of different occasions.

कक्षा 7 हिन्दी व्याकरण पाठ 35 पत्र लेखन

कक्षा: 7हिन्दी व्याकरण
अध्याय: 35पत्र लेखन

पत्र लेखन से आप क्या समझते हैं?

हम अपने मित्रों, संबंधियों तथा दूर रहने वाले लोगों तक सूचना, विचार या भाव पत्र अथवा चिट्ठी आदि के द्वारा भेजते हैं। पत्र में स्वाभाविकता होनी चाहिए। छोटी-मोटी बात तो टेलीफोन के द्वारा भी की जा सकती है। इसलिए आज के जीवन में पत्र के महत्त्व को नकारा नहीं जा सकता। पत्र लिखना भी एक कला है। पत्र लिखते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए:

    • 1. पत्र में लिखने वाले का पूरा पता और दिनांक उपयुक्त स्थान पर लिखा जाना चाहिए।
    • 2. जिस व्यक्ति को पत्र लिखा गया हो, उसके लिए उचित संबोधन का प्रयोग करना चाहिए। जैसे: पूज्य, पूजनीय, आदरणीय, महोदय, मान्यवर आदि।
    • 3. पत्र की भाषा सरल तथा सुबोध होनी चाहिए तथा वाक्य छोटे होने चाहिए।
    • 4. पत्र लिखते समय अपनी बात संक्षेप में कहनी चाहिए।
    • 5. प्रार्थना-पत्रों में लिखने वाले को अपने को छोटा मानते हुए अधिकारी या व्यक्ति (जैसे: प्रधानाचार्य, मुख्याध्यापक) के प्रति सम्मानपूर्ण भाषा का प्रयोग करना चाहिए तथा अपनी प्रार्थना स्वीकार करने के लिए कुछ कारण भी देना चाहिए ताकि वे आपकी प्रार्थना स्वीकार कर सकें।
    • 6. पत्र के अंत में लिखने वाले को संबंध के अनुरूप शब्दावली का प्रयोग करना चाहिए।




पत्र के प्रकार

सामान्यतया पत्र चार प्रकार के होते हैं:

    • 1. निजी या पारिवारिक पत्र
    • 2. प्रार्थना पत्र
    • 3. व्यावसायिक पत्र
    • 4. निमंत्रण, बधाई एवं धन्यवाद पत्र,
निजी या पारिवारिक पत्र

जो पत्र माता-पिता, भाई-बहन, मित्र तथा अन्य रिश्तेदारों को लिखे जाते हैं, वे निजी या पारिवारिक पत्र कहलाते हैं।

प्रार्थना पत्र

विद्यालय से अवकाश लेने, फीस माफी के लिए प्रधानाचार्य को लिखे जाने वाले पत्र प्रार्थना पत्र कहलाते हैं। इनके अतिरिक्त शिकायती पत्र जो अधिकारियों को लिखे जाते हैं, भी इसी श्रेणी में आते हैं, जैसे: स्वास्थ्याधिकारी, पोस्ट मास्टर आदि को लिखे जाने वाले पत्र।

व्यावसायिक पत्र

किसी दुकानदार, व्यापारी आदि से पुस्तक अथवा कोई वस्तु मँगवाने के लिए हम जो पत्र लिखते हैं, उसे व्यावसायिक पत्र कहते हैं।

निमंत्रण, बधाई एवं धन्यवाद पत्र

विवाह-जन्मदिन आदि अवसरों पर निमंत्रण हेतु दिए जाने वाले पत्र इस श्रेणी में आते हैं। इसी आशय से निमंत्रण प्राप्त करने वाला व्यक्ति बधाई तथा धन्यवाद देता है, ऐसे लिखे जाने वाले पत्रों को धन्यवाद पत्र एवं बधाई-पत्र कहते हैं।




पारिवारिक पत्र के अंग

पारिवारिक पत्र के निम्नलिखित अंग हैं। इनका ध्यान रखना अत्यावश्यक है।

    • 1. पत्र भेजने वाले का पता और दिनांक: पत्र के ऊपरी सिरे पर प्रायः बाईं ओर लिखा जाता है।
    • 2. संबोधन शब्द: पत्र शुरू करने से पहले पत्र की बाईं ओर सबसे ऊपर जिसे पत्र लिखा जा रहा है, उससे पत्र लिखने वाले के संबंध के अनुसार उपयुक्त संबोधन शब्द का प्रयोग किया जाता है। जैसे: पूज्य, पूजनीय, आदरणीय, श्रद्धेय, मान्यवर, श्रीयुत, प्रिय, प्रिय मित्र आदि।
    • 3. अभिवादन शब्द: संबोधन शब्द के ठीक नीचे अनुकूल अभिवादन का प्रयोग करना चाहिए। जैसे- सादर प्रणाम, नमस्ते, सादर नमस्ते, नमस्कार आदि।
    • 4. पत्र का विषय: इसके बाद पत्र का मुख्य विषय संक्षेप में लिखा जाता है।
    • 5. समाप्ति: पत्र की समाप्ति में भी पत्र लिखने वाले तथा पत्र प्राप्त करने वाले के संबंध के अनुसार कुछ शब्दों का प्रयोग किया जाता है। जैसे- तुम्हारा शुभचिंतक, आपका आज्ञाकारी, तुम्हारा मित्र, भवदीय, प्रार्थी आदि।
    • 6. पाने वाले का पता: जिसे पत्र भेजना हो, उसका पता पोस्टकार्ड अथवा लिफाफे पर लिखा जाता है। पाने वाले का पता लिखते समय पिन कोड नंबर अवश्य लिखना चाहिए, इससे पत्र शीघ्र तथा सही व्यक्ति के पास पहुँचता है।
पत्र लिखने में प्रशस्ति, अभिवादन तथा समाप्ति पत्र के प्रकार
पत्र के प्रकार/ संबंधसम्बोधनअभिवादन/समाप्ति
1. निजी पत्र/ बड़े पुरुषों कोपूज्य पिताजी/फूफाजी/ताऊजी/मौसाजी ताजी/चाचाजी/मामाजीसादर प्रणाम/ आपका/आपकी आज्ञाकारी
बड़ी स्त्रियों कोपूज्य माताजी/चाचीजी/ मामीजी/ फूफीजी/ताईजी/मौसीजीसादर प्रणाम/ आपका/आपकी आज्ञाकारी
बराबर वाले पुरुषोंप्रिय मित्र/प्रिय भाईनमस्ते/ नमस्कार/ आपका मित्र/ आपका भाई
बराबर वाली स्त्रियोंप्रिय सखी/प्रिय बहिननमस्ते/ नमस्कार/ आपकी सखी/ आपकी बहिन
छोटों कोप्रिय भाई/प्रिय राजेश, प्रिय बहिन या प्रिय रोशनीप्रसन्न रहो/ शुभचिंतक
2. प्रार्थना-पत्र/ मख्याध्यापक को मुख्याध्यापिका कोसेवा में /श्रीमान मख्याध्यापक जी सेवा में/श्रीमति मुख्याध्यापिका जीनमस्ते/ नमस्कार/ आपका/आपकी आज्ञाकारी
3. व्यावसायिक-पत्र/ पुस्तक-विक्रेता कोसेवा में व्यवस्थापक महोदय, महोदय/प्रिय महोदयनमस्कार/ भवदीय
4. निमंत्रण-पत्र एवं बधाई पत्रश्रीमान् ……. जी, श्रीमति ……. जीभवदीय आपका/आपकी

पत्र का नमूना

पत्र का नमूना (नया) पत्र का नमूना (पुराना)
स्थान ….. स्थान ……
दिनांक ………. दिनांक ……….
आदरणीय पिताजी, आदरणीय पिताजी,
सादर चरण-स्पर्श सादर चरण-स्पर्श
विषय…….. विषय………
आपका आज्ञाकारी पुत्र आपका आज्ञाकारी पुत्र
……………………………….. ……………………………………




1. प्रार्थना पत्र की रूपरेखा

(क) पदाधिकारी
(ख) स्थान
(ग) संबोधन
(घ) आरंभ
…………. ………….. ……………. ……………….. ……………. ………………………. ……………….
(ज) दिनांक (ङ) संबंधसूचक शब्द
(च) नाम ……………..
(छ) पता ………………

2. व्यापारिक पत्र का रूप

दुकान का पता अपना पता
……………………. (च) मुहल्ला ………………… (छ)शहर
(ज) दिनांक
(क) मैनेजर
(ख) दुकान का पता
(ग) स्थान
(घ) संबोधन
(ङ) कलेवर
……………… …………. ………….. …………….. …………….. ………………. ………………….. ……………….. ………
(झ) भवदीय
(ज) हस्ताक्षर

प्रार्थना-पत्र
1. विद्यालय छोड़ने का प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए अपने प्रधानाचार्य को प्रार्थना-पत्र लिखिए

सेवा में,
श्रीमान् प्रधानाचार्य महोदय,
ए पी जे पब्लिक स्कूल,
विकास पुरी, नई दिल्ली
दिनांक 20 मार्च 20…..
मान्यवर,
सविनय निवेदन यह है कि मेरे पिताजी का स्थानांतरण दिल्ली से शिमला हो रहा है, इसलिए मुझे भी परिवार के साथ शिमला जाना पड़ेगा। मेरे यहाँ रहने का कोई प्रबंध नहीं है। इसलिए कृपा करके मुझे स्कूल छोड़ने का प्रमाण-पत्र दिया जाए ताकि मैं वहाँ जाकर पढ़ाई जारी रख सकूँ। मैं आपका अति आभारी रहूँगा। धन्यवाद !
आपका आज्ञाकारी शिष्य
विकास सिंह
कक्षा सात (क)
अनुक्रमांक 03



2. फीस माफी के लिए अपने मुख्याध्यापक को प्रार्थना-पत्र लिखिए

सेवा में,
श्रीमान् मुख्याध्यापक जी,
xx……. विद्यालय,
xx………….
दिनांक…xx………….
मान्यवर,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा सात (क) में पढ़ता हूँ। मेरे पिताजी बहुत गरीब हैं। वे एक छोटी-सी दुकान चलाकर जैसे-तैसे घर का गुजारा करते हैं। घर में आठ सदस्य हैं। उन सबका बोझ भी पिताजी के सिर पर है। इसलिए मेरे पिताजी मेरी स्कूल फीस देने में असमर्थ हैं।
आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण पिताजी मेरी पढ़ाई बंद करवाना चाहते हैं। अतः आपसे प्रार्थना है, कि मेरी पूरी फीस माफ करने की कृपा करें। मैं आपका अति आभारी रहूँगा।
धन्यवाद सहित
आपका आज्ञाकारी शिष्य
नाम .xx.
कक्षा सात (क) अनुक्रमांक 6

3. अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र लिखिए

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
होली मैरी पब्लिक स्कूल,
सी-1, विकासपुरी
दिनांक 5 अप्रैल, 2019
मान्यवर, सविनय निवेदन यह है कि स्कूल से आते समय कल धूप लगने से बुखार हो गया। अतः मैं विद्यालय में उपस्थित नहीं हो सकता। इसलिए मुझे दो दिन (6 तथा 7 अप्रैल) का अवकाश देकर कृतार्थ करें। आपकी अति कृपा होगी।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
हिमांशु राज कक्षा सात (ख)
अनुक्रमांक 04

पारिवारिक तथा निजी पत्र

1. अपने मित्र को प्रथम आने पर बधाई देते हुए पत्र लिखिए

एम-40, पीतम पुरा,
नई दिल्ली – 1100xx
1 जुलाई 2019
प्रिय संदीप,
तुम्हारा पत्र मिला। पढ़कर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि इस बार भी परीक्षा में तुमने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। तुम्हारे अंकों से पता चलता है कि तुमने हर विषय में जी तोड़ परिश्रम किया है। यह जानकर और भी प्रसन्नता हुई कि पूरे विद्यालय में सबसे अधिक अंक पाने का गौरव भी तुम्हीं को प्राप्त हुआ है। अगर तुम इसी प्रकार परिश्रम और लगन से पढ़ाई करते रहे, तो वह दिन अवश्य आएगा, जब तुम अपने जीवन में कुछ बनकर अपने माता-पिता की आशाओं पर खरा उतरोगे। मेरी ओर से ढेर सारी शुभकामनाएँ। पूज्य चाचाजी और चाचीजी को सादर प्रणाम और बड़ी दीदी को सादर नमस्कार।
तुम्हारा प्रिय
अमन



2. अपने पिताजी को रुपए मँगवाने के लिए पत्र लिखिए

आदर्श पब्लिक स्कूल छात्रावास,
उत्तम नगर, नई दिल्ली
आदरणीय पिताजी,
सादर चरण-स्पर्श। आपका पत्र मिला तथा कुशलता आदि जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई। आपके आशीर्वाद से मैं यहाँ कुशलपूर्वक हूँ। आपको यह जानकर खुशी होगी कि अर्धवार्षिक परीक्षा में मैंने 98 प्रतिशत अंक प्राप्त करके कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। मुझे कुछ पुस्तकें, कॉपियाँ आदि खरीदनी हैं। अतः आपसे आग्रह है कि यथाशीघ्र डाक द्वारा एक हजार रुपये भिजवाने की कृपा करें। पूज्य माताजी को चरण-स्पर्श, राहुल को प्यार।
आपका आज्ञाकारी पुत्र,
गौरव

3. अपने मित्र को जन्म-दिन पर निमंत्रित करते हुए पत्र लिखिए

सी-1, मीरा नगर, माल रोड
इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
प्रिय अमन,
सप्रेम नमस्कार, तुम्हारा पत्र मिला। मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि तुम स्वस्थ हो तथा तुम्हारी पढ़ाई ठीक चल रही है। तुम्हें यह जानकर प्रसन्नता होगी कि गत वर्षों की भाँति इस बार भी 31 दिसंबर को मैं अपना जन्म-दिन मना रहा हूँ। जन्म-दिन पर मैंने अपने कुछ अन्य मित्रों को भी बुलाया है। जन्मदिन के कार्यक्रमों में 31 दिसंबर को माँ-भगवती का जागरण एवं भंडारा होगा। 31 दिसम्बर को पूजा होगी तथा दोपहर को सहभोज होगा। मुझे आशा है कि तुम इस बार एक दिन पूर्व ही परिवार सहित पधारकर मेरा उत्साह बढ़ाओगे।
तुम्हारा मित्र
मयंक

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