NCERT Solutions for Class 5 Hindi Chapter 12 गुरु और चेला

Free and updated NCERT Solutions for Class 5 Hindi Chapter 12 (Rimjhim – Guru aur Chela) गुरु और चेला, जो एक कविता है। Extra Questions based on the poem Guru aur Chela are given here to prepare well the chapter for exams.

Suitable answers are given as sample so that students can make their answers by own.

Class 5 Hindi Chapter 12 Guru aur Chela Solutions

कक्षा: 5 हिंदी – रिमझिम
अध्याय: 12 गुरु और चेला

Question Answers of Chapter 12 Exercises

अभ्यास 12 के प्रश्न उत्तर

अँधेर नगरी की प्रजा राजा के मरने पर खुश क्यों हुई?

अँधेर नगरी की प्रजा जानती थी कि उनका राजा मूर्ख राजा है। जिससे पूरी प्रजा दुखी थी, प्रजा जानती थी कि शासन को चलाने के लिए किसी योग्य राजा की आवस्यकता होती है। इसलिए अँधेर नगरी के राजा के मरने पर प्रजा खुश थी।

गुरु ने अपने चेले की जान बचाने के लिए क्या किया?

गुरु ने अपने चेले की जान बचाने के लिए राजा को झूट बोला कि फाँसी पर चढ़ने का बहुत ही शुभ मुहरत हैं, जो फाँसी चढ़ेगा वह चक्रवर्ती सम्राट बनेगा और पूरे संसार पर राज करेगा। यह सुन कर राजा स्वयं फाँसी पर चढ़ गया।

ग्वालिन की बात सुन कर गुरु अँधेर नगरी को छोड़ वापिस क्यों चला गया था?

ग्वालिन ने जब अँधेर नगरी के अनबूझ राजा के बारे में बताया तो गुरु समझ गया कि अँधेर नगरी में रहना खतरे से खाली नहीं हैं। राजा मुर्ख हैं, और सभी वस्तुओं के मूल्य एक समान हैं जो बड़े संकट का संकेत दे रही थी। यहाँ रहना मुसीबत मोल लेने के बराबर है।

दीवार क्यों गिरी थी? और इसके लिए किसको जिम्मेदार ठहराया गया?

बरसात के कारण दीवार गिर गई थी।इसके लिए प्राथमिक तौर पर संतरी को जिम्मेदार ठहराया गया था। लेकिन संतरी ने गलती कारीगर पर डाली, कारीगर ने भिश्ती पर, भिश्ती ने मस्क बनाने वाले पर और अंत में मस्क बनाने वाले ने मंत्री पर जिम्मेदारी डाल दी।

मंत्री को जिम्मेदार ठहराने के बावजूद उसे फंसी पर क्यों नहीं चढ़ाया गया?

अंततः मंत्री को जिम्मेदार ठहराने के बावजूद उसे फंसी पर नहीं चढ़ाया गया क्योंकि मंत्री एकदम दुबला-पतला था और उसकी गर्दन फंसी के फंदे में फिट नहीं बैठ रही थी।

मंत्री के बदले किसको फंसी चढ़ाने का फैसला हुआ?

मंत्री के बदले मोटी गर्दन वाले की तलाश की गई और उन्हें मोटा चेला मिल गया जिसको पकड़कर रजा के पास लाया गया ताकि उसे फंसी पर लटकाया जा सके।

चेले ने फांसी से बचने के लिए कौन सा दांव चला? क्या वह उसमे सफल रहा?

चेले ने फांसी से बचने के लिए एक तरकीब सोची उसने कहा कि उसके गुरु को बुलाया जाय। गुरु जब आये तो उन्होंने चेले को रोते देख और सारा हाल जानने के बाद एक तरकीब सोची उसने चेले को बुलाया और उसके कान में कुछ मन्त्र गुनगुनाया। उसके तुरंत बाद दोनों गुरु चेले आपस में लड़ने लगे कि मैं फांसी पर चढूंगा। राजा ने जानना चाहा कि आखिर बात क्या है तो गुरु ने कहा कि इस समय अत्यंत शुभ समय है। जो इस मुर्हत पर फांसी पर चढ़ेगा वह चक्रवर्ती सम्राट बनेगा। सारे संसार पर राज करेगा। रजा ने सोचा गुरु का कथन सत्य होगा इसलिए मैं स्वयं फांसी पर चढूंगा, और राजा फांसी पर चढ़ गया। इस तरह गुरु और चेले की युक्ति सफल हो गयी और प्रजा को पागल राजा से मुक्ति मिली।

इस कविता से हमें क्या सन्देश मिलता है?

इस कविता से हमें सन्देश मिलता है कि एक राजा को विवेकवान और न्यायप्रिय होना चाहिए और सकंट आने पर कैसे बुदिमानी का परिचय देना चाहिए यह गुरु और चेले की समझदारी से पता चलता है।

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